रांची: झारखंड में टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के पिछले चार महीने से बंद होने को लेकर केंद्र सरकार ने सख्ती दिखाई है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह से फोन पर बात कर योजना की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के 24 में से 17 जिलों में कुपोषण की स्थिति गंभीर है, ऐसे समय में करीब 13 लाख महिलाओं और बच्चों को पोषण आहार से वंचित कैसे रखा जा सकता है।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और फूड सिक्योरिटी एक्ट की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार को पहले से जानकारी थी कि राशन आपूर्ति करने वाली एजेंसियों की अवधि खत्म होने वाली है, इसके बावजूद समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार, झारखंड में टीएचआर योजना का लाभ लेने वालों में करीब 1.45 लाख गर्भवती महिलाएं, 1.15 लाख धात्री महिलाएं और 10.32 लाख छह महीने से तीन साल तक के बच्चे शामिल हैं।
इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार 50-50 प्रतिशत राशि देती हैं। लेकिन राशन सप्लाई करने वाली एजेंसियों की अवधि समाप्त होने के बाद अप्रैल से वितरण प्रभावित हो गया।
राज्य में टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए तीन एजेंसियां काम कर रही थीं, जिन्हें 24 जिलों में अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। इनकी अवधि समाप्त होने के बाद न नया वर्क ऑर्डर जारी हुआ और न ही नई व्यवस्था शुरू हो सकी।
हालांकि समाज कल्याण विभाग की ओर से बताया गया है कि तीनों एजेंसियों को अवधि विस्तार देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। विभागीय मंत्री की सहमति मिल चुकी है और इसे जल्द कैबिनेट में भेजे जाने की उम्मीद है।
टीएचआर योजना के तहत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को पोषण युक्त सूखा राशन दिया जाता है, जिसमें दाल, मूंगफली, गुड़ और स्थानीय अनाज जैसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।
अब इस मामले में केंद्र की नाराजगी के बाद झारखंड सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है।