रांची: स्वतंत्रता दिवस के दिन राजधानी रांची में PSC-JSSC परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया। 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होकर झंडा फहराने से रोक दिया गया। इसके बाद सदर अस्पताल में पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
प्रशासन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए देवेंद्रनाथ महतो को अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। वहीं छात्र नेता ने इसे अपने अधिकारों का हनन बताते हुए सवाल उठाया कि स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने से रोकना आखिर किस तरह की आजादी है।
सदर अस्पताल के आईसीयू से लेकर मुख्य गेट तक भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसी भी व्यक्ति को आईसीयू के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस की मौजूदगी के बीच छात्र नेता को अस्पताल से बाहर निकलने से रोका गया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
दूसरी ओर, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से छात्रों ने 300 मीटर लंबे तिरंगे के साथ विशाल तिरंगा यात्रा निकाली। कचहरी चौक, लालपुर और अल्बर्ट एक्का चौक से गुजरते हुए हजारों छात्र इस यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारे गूंजते रहे।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि PSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षा रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा। कई छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही है।
शाम में छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के पुतले भी फूंके। आंदोलनकारियों का कहना है कि 22 दिनों से जारी आंदोलन के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
स्वतंत्रता दिवस पर निकली इस तिरंगा यात्रा ने छात्र आंदोलन को नया प्रतीकात्मक बल दिया है, वहीं अस्पताल में छात्र नेता को रोके जाने की घटना अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गई है।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: अब बिना वजह बड़े अस्पताल नहीं भेजे जाएंगे मरीज, बिहार में लागू हुई नई रेफरल नीति!