रांची: झारखंड में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करते हुए अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध शराब के कारोबार को बढ़ने नहीं दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
झारखंड मंत्रालय में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने विभाग की योजनाओं, राजस्व संग्रहण, अवैध शराब के खिलाफ चल रही कार्रवाई और भविष्य की कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अवैध शराब पर जीरो टॉलरेंस की नीति
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में अवैध रूप से होने वाले शराब निर्माण, परिवहन, बिक्री और तस्करी पर पूरी सख्ती से रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब का कारोबार सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए और विभागीय निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।
शराब ढोने वाले वाहनों पर होगी डिजिटल निगरानी
मुख्यमंत्री ने विभाग में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मदिरा परिवहन करने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल लॉक व्यवस्था लागू की जाए।
इस व्यवस्था से वाहनों की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी। वाहन कहां से चला, किस रास्ते से गया और कहां पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी विभाग के पास उपलब्ध होगी। सरकार का मानना है कि इससे शराब की अवैध सप्लाई और रास्ते में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
उत्पाद विभाग में खाली पद जल्द भरे जाएंगे
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में खाली पड़े पदों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी रिक्तियों को जल्द भरा जाए ताकि विभाग का कामकाज और मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्याप्त मानव संसाधन के बिना योजनाओं और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया को समय सीमा के अंदर पूरा किया जाए।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से चयनित 583 उत्पाद सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
राजस्व में विभाग ने किया बेहतर प्रदर्शन
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभाग के राजस्व संग्रहण की जानकारी दी। बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व प्राप्त किया।
विभाग का लक्ष्य 3,885.11 करोड़ रुपए था, जबकि विभाग ने इससे अधिक 4,013.53 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया।
वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने 4,500 करोड़ रुपए राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2026 तक विभाग 1,376 करोड़ रुपए राजस्व जुटा चुका है।
नई मदिरा विनिर्माण नीति बनाने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने राज्य में मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने औद्योगिक अल्कोहल के नियमन और स्पिरिट की खपत को लेकर व्यापक अध्ययन करने को कहा।
सरकार अब राज्य में शराब उद्योग, औद्योगिक उपयोग और राजस्व बढ़ाने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नई नीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
गोदाम निर्माण में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने उत्पाद विभाग के गोदाम निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं को जनहित और विकास की सोच के साथ आगे बढ़ाया जाए।
बैठक में कई बड़े अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल, उत्पाद आयुक्त संदीप सिंह, झारखंड राज्य बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी नीरज कुमार सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब देखना होगा कि अवैध शराब के खिलाफ सरकार की यह नई रणनीति जमीन पर कितना असर दिखाती है और क्या तकनीक के इस्तेमाल से तस्करी के नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम लग पाएगी।
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