छपरा: सारण जिले में गंडक नदी की विकराल बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। मकेर और पानापुर में तटबंध टूटने के बाद 33 पंचायतों के हजारों बाढ़ पीड़ित बांधों और सड़कों पर पन्नी तानकर दिन काटने को मजबूर हैं। एक तरफ जहां लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मदद की आस लगाए पीड़ितों पर खाकी का खौफनाक और बेखौफ चेहरा देखने को मिला है।
मकेर थाना के दारोगा सह थानाध्यक्ष संग्राम कुमार सिंह का एक रूह कंपा देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो में राहत सामग्री वितरण के दौरान मदद मांग रहे लाचार बाढ़ पीड़ितों को दारोगा जी पहले चप्पल दिखाते हैं और फिर सरेआम अपनी सरकारी पिस्टल तान देते हैं। खाकी के इस संगदिल रवैये ने पूरे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाढ़ की मार के बीच खाकी का तांडव
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार दिनों से उनके घर-बार पूरी तरह जलमग्न हैं। बच्चों के लिए दूध, खाने का राशन और पशुओं के चारे तक की भारी किल्लत है। प्रशासन की नाकामी के बीच जब सामाजिक संगठन राहत बांटने पहुंचे, तो वहां भी पुलिस का अमानवीय तांडव शुरू हो गया। हक मांग रहे भूखे-प्यासे ग्रामीणों पर पुलिस ने हमदर्दी दिखाने के बजाय पिस्टल तानकर दहशत फैलाने की कोशिश की।
बवाल बढ़ते ही हरकत में आया महकमा, मकेर थानाध्यक्ष निलंबित
सारण पुलिस की इस गुंडागर्दी का वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की तूल पकड़ते ही वरिष्ठ अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा। सारण पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मकेर थानाध्यक्ष पु०अ०नि० संग्राम कुमार सिंह की इस हरकत को घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना।
एसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत थानाध्यक्ष संग्राम कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, सारण तय किया गया है। पुलिस महकमे का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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