पटना: बिहार बंद के दौरान जहां पूरे राज्य में प्रदर्शन हो रहे थे, वहीं सीवान अचानक हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए सीधी फायरिंग का सहारा लेना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले नारेबाजी और विरोध हो रहा था, लेकिन देखते ही देखते माहौल उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरों की बारिश शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, लेकिन जब हालात नहीं संभले तो लगातार 10 राउंड से ज्यादा गोलियां चलाई गईं।
गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सड़कों पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इसी दौरान सीवान के एसपी पूरन कुमार झा भी पत्थरबाजी में घायल हो गए।
सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बन गया टकराव का मैदान
सीवान में जो शुरू हुआ वह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सीधा टकराव बन गया। एक तरफ उग्र भीड़, दूसरी तरफ पुलिस—और बीच में गोलियों की गूंज।
हालांकि पुलिस का कहना है कि फायरिंग हालात को नियंत्रित करने के लिए की गई, लेकिन इस घटना ने पूरे बिहार में बंद के स्वरूप को बदल दिया है।
दूसरे जिलों में भी उबाल, पर सीवान सबसे आगे
राज्य के पटना, छपरा, भागलपुर, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, बेतिया और लखीसराय में भी पथराव, लाठीचार्ज और आगजनी की घटनाएं हुईं, लेकिन सीवान की फायरिंग ने पूरे आंदोलन को सबसे ज्यादा सुर्खियों में ला दिया।
छपरा में पुलिस वैन जलाई गई, पटना में बैरिकेडिंग तोड़ी गई और भागलपुर में पुलिस पर हमले हुए। लेकिन कहीं भी हालात इतने नहीं बिगड़े जितने सीवान में दिखे।
हाई अलर्ट पर बिहार, सख्ती बढ़ी
घटना के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल भेजा गया है।
प्रदर्शन से हिंसा तक का सफर
NEET पेपर लीक और इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब कई जगहों पर हिंसक हो चुका है। सीवान की फायरिंग ने यह साफ कर दिया कि हालात कितने तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उपद्रवियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
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