लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी को बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए निकलीं तीन महिलाओं को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी। आस्था, श्रद्धा और भक्ति से शुरू हुई यात्रा अशोक धाम मंदिर में हुई भगदड़ के बीच दर्दनाक त्रासदी में बदल गई। इस हादसे में लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड अंतर्गत प्रतापपुर गांव की एक ही परिवार से जुड़ी तीन महिलाओं की मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
मृतकों में सुरेंद्र यादव की पत्नी हेमलता देवी, रणवीर यादव की पत्नी सविता देवी और गोरेलाल यादव की पत्नी ललिता देवी शामिल हैं। तीनों रिश्ते में गोतनी थीं और एक साथ बाबा इन्द्रदमनेश्वर महादेव के जलाभिषेक के लिए निकली थीं। लेकिन मंदिर के दक्षिणी द्वार पर मची भगदड़ ने तीनों की जिंदगी छीन ली।
भक्ति यात्रा से मातम तक
जानकारी के अनुसार प्रतापपुर पंचायत के पूर्व मुखिया शिवनंदन यादव के परिवार की महिलाएं और गांव की अन्य श्रद्धालु महिलाएं रविवार की शाम अशोक धाम के लिए रवाना हुई थीं। योजना के अनुसार सभी महिलाओं ने पहले बड़हिया कॉलेज घाट पर गंगा स्नान किया और वहां से गंगाजल लेकर ट्रेन के माध्यम से अशोक धाम पहुंचीं।
सोमवार की अलसुबह सभी श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर अचानक भगदड़ मच गई। अफरा-तफरी के बीच कई श्रद्धालु गिर पड़े। जब तक स्थिति संभलती, तब तक प्रतापपुर गांव की तीन महिलाओं की जान जा चुकी थी।
एक साथ बुझ गए तीन घरों के चिराग
जैसे ही हादसे की खबर प्रतापपुर गांव पहुंची, पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। पूर्व मुखिया शिवनंदन यादव के घर सहित पूरे परिवार में कोहराम छा गया। देखते ही देखते गांव के लोगों की भीड़ पीड़ित परिवारों के घरों पर जुट-ने लगी।
सबसे मार्मिक दृश्य उन बच्चों का था, जो अपनी मां को खोने के बाद बिलख-बिलख कर रो रहे थे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि सावन की पूजा के लिए गईं महिलाएं अब कभी वापस नहीं लौटेंगी।
13 बच्चों के सिर से उठ गया मां का साया
इस हादसे ने केवल तीन महिलाओं की जान नहीं ली, बल्कि 13 बच्चों को मां के प्यार से भी वंचित कर दिया।
- ललिता देवी अपने पीछे 5 बच्चों को छोड़ गईं।
- हेमलता देवी के 2 बच्चे हैं।
- सविता देवी के 6 बच्चे हैं।
अब इन बच्चों की आंखों में अपनी मां को खोने का दर्द साफ दिखाई देता है। गांव में हर व्यक्ति की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर भगवान ने इतनी बड़ी परीक्षा क्यों ली।
गांव में पसरा मातम
घटना की जानकारी मिलते ही पैक्स अध्यक्ष वीरेंद्र महतो, पूर्व पंचायत समिति सदस्य कपिलदेव महतो, उपमुखिया रविंद्र कुमार, नरेश महतो, गजाधर महतो समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवारों के घर पहुंचे। सभी ने शोक व्यक्त करते हुए परिजनों को सांत्वना दी और इस दुख की घड़ी में धैर्य बनाए रखने की अपील की।
प्रतापपुर गांव के बुजुर्गों का कहना है कि सावन की तीसरी सोमवारी अब इस गांव के लिए कभी उत्सव का दिन नहीं रहेगी। हर वर्ष यह दिन उन तीन महिलाओं की दर्दनाक याद लेकर आएगा, जो भगवान के दरबार में माथा टेकने गई थीं, लेकिन वापस अपने घर नहीं लौट सकीं।
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