लखीसराय (बिहार): लखीसराय जिले के पिपरिया प्रखंड का पिपरिया दियारा गांव आज गर्व से भरा हुआ है। वजह है—एक साधारण किसान परिवार का बेटा, जिसने अपने दम पर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS), अजमेर में जगह बना ली है। लाल इंटरनेशनल स्कूल के मेधावी छात्र विवेक राज का कक्षा 9 में अंतिम चयन हुआ है, जिसने पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।
यह उपलब्धि यूं ही नहीं मिली। इसके पीछे है कठिन मेहनत, अनुशासन और एक लंबी चयन प्रक्रिया। विवेक ने लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल टेस्ट—तीनों चरणों को सफलतापूर्वक पार किया। देशभर के हजारों छात्रों के बीच यह मुकाम हासिल करना किसी बड़ी जीत से कम नहीं है।
भारत में कुल 5 राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल संचालित हैं—अजमेर, चैल, धौलपुर, बेलगावी और बेंगलुरु। सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में दाखिले के लिए सिर्फ 149 सीटें थीं। इनमें भी लगभग 70 प्रतिशत सीटें सेना और रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित थीं, जबकि केवल 30 प्रतिशत सीटों पर सिविलियन छात्रों का चयन होना था। ऐसे में सीमित अवसरों के बीच विवेक का चयन होना उसकी प्रतिभा और मेहनत की सबसे बड़ी पहचान है।
विवेक राज का परिवार बेहद साधारण है। उनके पिता नवीन कुमार खेती से जुड़े हैं और साथ ही एलआईसी अभिकर्ता के रूप में भी काम करते हैं। दियारा क्षेत्र जैसे सीमित संसाधनों वाले इलाके में रहते हुए भी विवेक ने अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। यही जिद और समर्पण आज उसे इस मुकाम तक लेकर आई है।
इस सफलता के पीछे लाल इंटरनेशनल स्कूल की भूमिका भी बेहद अहम रही है। स्कूल की अनुशासित शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर दिया गया ध्यान—इन्हीं सबने विवेक जैसे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का आत्मविश्वास दिया है।
स्कूल का प्रदर्शन भी इस साल काफी शानदार रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 69 छात्रों ने सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में सफलता पाई, 3 छात्रों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ और 5 छात्रों ने सिमुलतला प्रवेश परीक्षा में बाजी मारी। यह उपलब्धियां बताती हैं कि यहां केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ा जा रहा है।
स्कूल के डायरेक्टर मुकेश कुमार और प्राचार्य मनीषा कुमारी ने विवेक की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक छात्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे स्कूल परिवार की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा,
“हमारा लक्ष्य सिर्फ परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करना है। आज एक परिणाम आया है, कल इससे भी बड़ा परिणाम जरूर आएगा।”
विवेक की इस उपलब्धि से न सिर्फ स्कूल, बल्कि पूरे लखीसराय जिले में खुशी की लहर है। गांव के लोग गर्व से कह रहे हैं—“हमारे गांव का बेटा अब देश का नाम रोशन करेगा।”
यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं है, बल्कि उस हौसले की है जो हर मुश्किल को पार कर जाता है।
दियारा की मिट्टी से निकला यह सितारा अब देश की नई पहचान बनने की राह पर है… और यह तो बस शुरुआत है!
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