बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से जुड़े केस में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट की मूल प्रति गायब होने और उसकी जगह फोटोकॉपी दाखिल किए जाने पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। उस दौरान जीडी कॉलेज में एक सभा के दौरान दिए गए बयान को लेकर नगर थाना में कांड संख्या 221/19 दर्ज किया गया था। इस केस में अनुसंधान के बाद पुलिस को न्यायालय में मूल आरोप पत्र दाखिल करना था, लेकिन पुलिस ने 20 पन्नों की चार्जशीट में केवल 3 पेज मूल और 17 पन्ने फोटोकॉपी के रूप में पेश कर दिए।
इस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने कड़ा विरोध जताते हुए कोर्ट में आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि न केवल चार्जशीट की मूल प्रति गायब है, बल्कि केस की मूल डायरी और जब्ती सूची भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस आधार पर संज्ञान लेना कानून के अनुरूप नहीं है।
अधिवक्ता ने यह भी बताया कि इस मामले में पहले भी पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक के स्तर से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन नगर थाना की ओर से अब तक मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
बताया जाता है कि 15 मई 2026 को इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन दस्तावेजों की स्थिति को देखते हुए कानूनी बहस तेज हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक अहम राजनीतिक केस में मूल दस्तावेजों का गायब होना लापरवाही या किसी बड़ी चूक की ओर इशारा कर रहा है।
वहीं, जब इस मामले पर बेगूसराय के एसपी मनीष कुमार से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने इसे न्यायालय से जुड़ा मामला बताते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने अहम केस की मूल डायरी और चार्जशीट के पन्ने कहां गायब हो गए, और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
ये खबर भी पढ़े: Bihar News : राजगीर में आस्था का सागर, मलमास मेला शुरू, CM ने किया उद्घाटन!