लखीसराय में इस बार नया शैक्षणिक सत्र सिर्फ पढ़ाई की शुरुआत नहीं, बल्कि “हर बच्चे तक शिक्षा” पहुंचाने का मिशन लेकर आया है। लखीसराय जिले में 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है, जो पूरे अप्रैल महीने तक चलेगा।
इस अभियान की कमान संभाल रहे हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम, जिनका साफ संदेश है—“कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहेगा।”
1 से 30 अप्रैल तक चलने वाले इस महाअभियान के तहत शिक्षक और शिक्षा कर्मी अब स्कूलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े छोटे बच्चों की जिम्मेदारी सेविका और सहायिका को दी गई है, जबकि प्रधानाध्यापक अपने-अपने क्षेत्रों में टीम बनाकर बच्चों की पहचान करेंगे।
सबसे खास बात यह है कि जिन बच्चों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उनका भी अस्थायी नामांकन किया जाएगा। बाद में उन्हें दस्तावेज बनवाने में मदद दी जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा सिर्फ कागजी कमी के कारण शिक्षा से दूर न रह जाए।
महादलित टोला और वंचित वर्गों के बच्चों पर विशेष फोकस रखा गया है, जिससे समाज के अंतिम पायदान तक शिक्षा की रोशनी पहुंच सके।
इस बार स्कूलों का माहौल भी बदला-बदला नजर आएगा। नए बच्चों के स्वागत के लिए रंगोली सजाई जाएगी, तोरणद्वार बनाए जाएंगे और एक उत्सव जैसा माहौल तैयार किया जाएगा, ताकि बच्चों में स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़े।
अभियान के अंत में हर प्रधानाध्यापक को यह प्रमाणित करना होगा कि उनके क्षेत्र का कोई भी बच्चा नामांकन से छूटा नहीं है। वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी इसकी रिपोर्ट जिला स्तर पर प्रस्तुत करेंगे।
यह पहल सिर्फ एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने की कोशिश है—जहां हर बच्चा स्कूल जाएगा, पढ़ेगा और अपने सपनों को नई उड़ान देगा।
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