लखीसराय: बिहार अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ भवन में बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ, लखीसराय इकाई का स्थापना सम्मेलन उत्साह और जोश के साथ सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से सैकड़ों रसोइयों ने भाग लिया और अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता ऊषा देवी, नूतन देवी और शिव नंदन पण्डित के अध्यक्ष मंडल ने संयुक्त रूप से की, जबकि संचालन भी उनके द्वारा ही किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षक नेता सत्यार्थी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में सरोज चौबे मौजूद रहीं, जो बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की महासचिव हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरोज चौबे ने कहा कि रसोइयों को अपने अधिकारों और मांगों के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखते हुए अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का विरोध जताया।
वहीं उद्घाटनकर्ता सत्यार्थी ने अपने संबोधन में कहा कि रसोइयों को अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज करना होगा और संगठन को मजबूत बनाना समय की जरूरत है।
सम्मेलन में श्रम कानूनों को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने बताया कि 1 अप्रैल से लागू होने वाले श्रम कोड कानूनों के विरोध में ऐक्टू समेत 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा ‘काला दिवस’ मनाया जाएगा। लखीसराय में भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
शिव नंदन पण्डित ने संगठन के कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि नरेश महतो, उपेन्द्र तांती, ऊषा देवी और नूतन देवी सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
सम्मेलन के दौरान संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से 11 सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया। इसमें सम्मानित अध्यक्ष के रूप में सत्यार्थी, अध्यक्ष ऊषा देवी, उपाध्यक्ष गायत्री देवी, सचिव शिव नंदन पण्डित और सह सचिव नूतन देवी को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कई अन्य सदस्यों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम में विन्देश्वरी मांझी, दीनदयाल यादव, नरेश प्रसाद, राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा, विनोद कुमार दास समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सम्मेलन के अंत में रसोइयों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
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