लखीसराय: व्यापारिक समृद्धि, सामाजिक समानता और लोक कल्याण के संदेश को समर्पित महाराजा अग्रसेन की 5150वीं जयंती रविवार को शहर के पुरानी बाजार स्थित धर्मशाला (अग्रसेन भवन) में उत्सवी माहौल में मनाई गई। मारवाड़ी अग्रवाल पंचायत, लखीसराय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में अग्रवाल और अग्रहरि समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। समारोह में पूजा-अर्चना, पुष्पांजलि, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से महाराजा अग्रसेन को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन और फीता काटकर हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन सुमित कुमार ड्रोलिया, अशोक राजगढ़िया, लायंस विजय बंका, ओमप्रकाश ड्रोलिया और शैलेश तुलस्यान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर एवं फीता काटकर किया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने महाराजा अग्रसेन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
समारोह में समाज के लोगों ने महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को याद करते हुए व्यापारिक उन्नति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी, सेवा और लोक कल्याण के महत्व पर जोर दिया।
बच्चों और महिलाओं के लिए हुईं कई प्रतियोगिताएं
जयंती समारोह को खास बनाने के लिए बच्चों और महिलाओं के बीच कई तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें पेंटिंग, फैंसी ड्रेस, डांस और म्यूजिकल चेयर जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही समाज के बुजुर्गों को भी सम्मानित किया गया। आयोजन के जरिए नई पीढ़ी को सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।
मनीषा अग्रवाल ने आयोजन में निभाई अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखंड से मनीषा अग्रवाल को आमंत्रित किया गया था। मारवाड़ी महिला समिति की मीरा ड्रोलिया और सचिव सुनीता ड्रोलिया ने प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन में महिलाओं की भागीदारी और बच्चों की प्रस्तुतियों ने समारोह को जीवंत बना दिया।
18 गोत्रों के प्रवर्तक के रूप में याद किए गए महाराजा अग्रसेन
मारवाड़ी अग्रवाल पंचायत के सचिव सुमित कुमार ड्रोलिया और अशोक राजगढ़िया ने महाराजा अग्रसेन के जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन को 18 गोत्रों के प्रवर्तक के रूप में याद किया जाता है। गर्ग, गोयल, बंसल और सिंघल जैसे गोत्रों के नामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि महाराजा अग्रसेन अहिंसा और करुणा के प्रतीक थे। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने यज्ञों में पशुबलि का विरोध किया और जीवों के प्रति दया तथा मानवीय मूल्यों को महत्व दिया।
व्यापार के साथ लोक कल्याण का संदेश
महाराजा अग्रसेन की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह ने समाज में एकता, सेवा, अहिंसा और लोक कल्याण के महत्व को सामने रखा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और बुजुर्गों के सम्मान के माध्यम से आयोजन ने विभिन्न पीढ़ियों को एक मंच पर जोड़ा।
लखीसराय के अग्रसेन भवन में आयोजित यह समारोह श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।
ये खबर भी पढ़े: लखीसराय में खुला ‘रोशनी आई केयर सेंटर’, सभापति अरविंद पासवान और विधायक रामानंद मंडल ने किया उद्घाटन!
