नवादा: रजौली प्रखंड में 45 साल पुरानी हरदिया डैम पुलिया अचानक भरभराकर गिर गई। पुलिया टूटने के बाद दर्जनों गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे निर्माण कार्य में लगे ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही ने इस पुराने पुल को कमजोर कर दिया।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1980 में बनी यह पुलिया तिलैया-कोडरमा रेलखंड निर्माण कार्य में लगे भारी वाहनों का दबाव नहीं झेल सकी। लोहे, बालू, सीमेंट और गिट्टी से लदे भारी ट्रकों के लगातार गुजरने के कारण पुलिया क्षतिग्रस्त हुई और आखिरकार ध्वस्त हो गई।
पुलिया टूटने से सुअरलेटी, पिपरा, परतौनिया, चोरडीहा, भानेखाप समेत कई गांवों का रास्ता बंद हो गया है। हजारों ग्रामीण, किसान और स्कूली बच्चे अब परेशान हैं। लोगों को मजबूरी में 3 से 4 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि पुलिया टूटने से इलाके की सिंचाई व्यवस्था और करीब 90 गांवों की नल-जल योजना प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट भी खड़ा हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से रेलवे निर्माण कंपनियों के भारी वाहन इस मार्ग से गुजर रहे थे, लेकिन ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लगाई गई। इसी लापरवाही का नतीजा आज गांवों को भुगतना पड़ रहा है।
हालांकि पुलिया टूटने से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता और भारी वाहनों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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