लखीसराय: पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई के लिहाज से एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। मोकामा (राजेन्द्रपुल-हाथीदह ऊपर) में गंगा नदी पर ₹2400 करोड़ की लागत से निर्मित नए दोहरे रेल पुल (डबल लाइन) तथा विद्युतीकरण कार्य का संरक्षा आयुक्त, पूर्वी सर्किल (कोलकाता) गुरु प्रकाश द्वारा गहन निरीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। CRS से हरी झंडी मिलने के साथ ही अब इस नवनिर्मित पुल से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया है।
1.9 किमी लंबा मुख्य ब्रिज, 15.5 किमी का पूरा प्रोजेक्ट
पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सरस्वती चंद्र ने बताया कि लगभग 15.5 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में गंगा नदी पर मुख्य रेल पुल की लंबाई 1.9 किलोमीटर है। इसे वर्तमान राजेंद्र पुल के समानांतर (पटना छोर की तरफ 50 मीटर की दूरी पर) बनाया गया है।
प्रोजेक्ट के तहत गंगा नदी पर 17 स्टील स्पैन, 3.6 किमी का रेल वायडक्ट, 8 लघु पुल, 2 सड़क उपरि पुल (ROB) और 3 रेल ओवर रेल (ROR) का निर्माण किया गया है। इसके एप्रोच को इस तरह जोड़ा गया है कि उत्तर में हाथीदह, टाल व रामपुर डुमरा तथा दक्षिण में राजेन्द्रपुल व बरौनी स्टेशनों से यह सीधा कनेक्ट रहेगा।
ट्रैफिक में 2.5 गुना इजाफा, पुराने पुल से भी जारी रहेगा परिचालन
नए डबल लाइन पुल के चालू होने के बाद भी पुराने राजेंद्र सेतु से ट्रेनों की आवाजाही जारी रहेगी। इससे अब मोकामा में कुल तीन रेल लाइनों का मजबूत नेटवर्क उपलब्ध हो गया है। सीपीआरओ ने बताया कि इस नए मार्ग से रेलवे ट्रैफिक क्षमता में करीब 2.5 गुना वृद्धि होने का अनुमान है।
व्यापार और कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम
उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत (North-East) के लिए यह पुल वरदान साबित होगा। ट्रेनों की लेटलतीफी दूर होगी, वहीं माल ढुलाई के समय और लागत में भारी कमी आएगी, जिससे स्थानीय व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को नई गति मिलेगी।
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