दरभंगा: लोहिया स्वच्छता मिशन के तहत दरभंगा जिले की पंचायतों में डस्टबिन खरीद और वितरण अब सवालों के घेरे में है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच पंचायत स्तर पर करीब 18 लाख डस्टबिन की खरीद दर्ज है। 89.50 रुपए प्रति डस्टबिन की दर मानें तो कुल भुगतान करीब 16.11 करोड़ रुपए बैठता है।
मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि बाजार पड़ताल में इसी तरह की सामान्य बाल्टी/डस्टबिन की कीमत करीब 45 से 55 रुपए के बीच बताई गई। हालांकि केवल बाजार कीमत के आधार पर वित्तीय अनियमितता साबित नहीं होती। इसके लिए खरीदे गए डस्टबिन के वजन, आकार, प्लास्टिक की गुणवत्ता, तकनीकी मानक, सप्लायर और खरीद प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
योजना के तहत एक परिवार को गीला और सूखा कचरा अलग रखने के लिए दो डस्टबिन देने का प्रावधान बताया गया है। दो बाल्टियों के लिए 180 रुपए का मॉडल एस्टीमेट भी सामने आया है। पंचायतों में खरीद GeM पोर्टल के माध्यम से होने की जानकारी है।
जमीनी स्तर पर भी शिकायतें सामने आई हैं। कुछ ग्रामीणों ने डस्टबिन नहीं मिलने की बात कही, जबकि कुछ ने मिलने के बाद कुछ ही महीनों में टूट जाने का दावा किया। कई इलाकों में डोर-टू-डोर कचरा उठाव नियमित नहीं होने की शिकायत भी है।
अब जांच का असली सवाल यह है कि 18 लाख डस्टबिन की खरीद किस सप्लायर से, किस दर पर और किन मानकों के आधार पर हुई? कितने डस्टबिन वास्तव में वितरित किए गए और उनकी गुणवत्ता कैसी थी? भुगतान से जुड़े वाउचर, आपूर्ति आदेश, GeM रिकॉर्ड और तकनीकी जांच से ही तस्वीर साफ होगी।
जिला समन्वयक प्रशांत कुमार ने कहा कि खरीद पंचायत स्तर पर हुई है और निर्धारित मॉडल के अनुसार खरीद की गई है। डीडीसी स्वप्निल ने लिखित शिकायत मिलने पर जांच की बात कही है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी पवन कुमार ने भी गड़बड़ी होने पर इसे गंभीर जांच का विषय बताया।
अब नजर इस बात पर है कि शिकायत के बाद जांच कब शुरू होती है और क्या 16 करोड़ से अधिक के भुगतान का जमीनी हिसाब सामने आता है।
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