भारत/नेपाल: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का असर अब सिर्फ जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं रह गया है। आपदा ने देश की सड़क, पुल, व्यापार, बैंकिंग, शिक्षा, कृषि और ऊर्जा व्यवस्था को भी गहरी चोट पहुंचाई है। प्रतिनिधि सभा की वित्त समिति में पेश शुरुआती नुकसान के आंकड़ों ने तबाही की भयावह तस्वीर सामने रखी है।
नेपाल के वित्त सचिव डॉ. घनश्याम उपाध्याय ने समिति की बैठक में बताया कि रसुवा में बाढ़ और कृष्णभीर में सड़क धंसने के कारण चीन से होने वाली आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। रसुवागढ़ी सीमा नाके पर बाढ़ के बाद चीन से होने वाला व्यापारिक आवागमन ठप हो गया, जिसका सीधा असर सीमा शुल्क राजस्व पर पड़ा है।
चीन नाका बंद, वैकल्पिक रास्ता भी संकट में
वित्त सचिव के अनुसार, रसुवागढ़ी के विकल्प के तौर पर सरकार ने कोराला सीमा नाके पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की थी, ताकि आयात व्यवस्था को किसी हद तक जारी रखा जा सके। लेकिन कृष्णभीर में सड़क धंसने के बाद आपूर्ति मार्ग को एक और बड़ा झटका लगा।
सबसे बड़ा नुकसान बेत्रावती–रसुवागढ़ी सड़क को हुआ है। बाढ़ में करीब 55 किलोमीटर सड़क पूरी तरह नष्ट हो गई। आधिकारिक प्रारंभिक आकलन में भी 55 किलोमीटर सड़क के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की गई है।
33 मोटरेबल पुल पूरी तरह तबाह
बाढ़ की मार सिर्फ सड़कों तक नहीं रुकी। चार जिलों में 33 मोटर चलने योग्य पुल पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि चार अन्य पुलों को आंशिक नुकसान पहुंचा। इसके अलावा 68 सस्पेंशन ब्रिज भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
प्रारंभिक सरकारी आकलन में 37 मोटरेबल पुलों को क्षतिग्रस्त बताया गया है, जिनमें 33 पूरी तरह नष्ट हुए हैं।
इसका सीधा असर दूरदराज के इलाकों की आवाजाही, राहत सामग्री की आपूर्ति और कारोबार पर पड़ा है।
7,570 घरों पर बाढ़ की मार
आपदा के प्रारंभिक आकलन में करीब 7,570 निजी घर प्रभावित पाए गए हैं। इन घरों से जुड़े लगभग 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। 48 सरकारी भवनों को भी नुकसान पहुंचा है, जिनमें 35 पूरी तरह नष्ट बताए गए हैं।
शिक्षा व्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा है। शुरुआती आकलन के अनुसार 18 स्कूल प्रभावित हुए, जिनमें 11 पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताए गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र की भी सात सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।
हजारों कारोबार और उद्योगों पर संकट
वित्त सचिव के अनुसार करीब 4,800 व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह नष्ट हुए हैं। विस्तृत क्षेत्रवार आकलन में होटल-रेस्तरां, थोक एवं खुदरा कारोबार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित बताए गए हैं।
इसका असर केवल स्थानीय कारोबार पर नहीं, बल्कि रोजगार और सरकारी राजस्व पर भी पड़ने की आशंका है। चीन से होने वाले व्यापार में व्यवधान ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।
कृषि से बिजली तक भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था के ग्रामीण आधार को भी प्रभावित किया है। करीब 1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होने की पुष्टि प्रारंभिक सरकारी आकलन में हुई है। इसके अलावा 13 जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। सरकारी अपडेट के मुताबिक इन परियोजनाओं से जुड़ी प्रभावित बिजली उत्पादन क्षमता करीब 783 मेगावाट है।
इसके साथ ही एक सौर परियोजना और दो ट्रांसमिशन लाइनें भी प्रभावित हुई हैं।
सड़क टूटी तो व्यापार की रफ्तार भी थमी
रसुवागढ़ी नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। बाढ़ से सड़क और पुलों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण माल की आवाजाही पर सीधा असर पड़ा है। नेपाल के वित्त मंत्रालय ने भी माना है कि इस व्यवधान का असर सीमा शुल्क राजस्व पर दिखाई दे रहा है।
यानी बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी नेपाल के सामने असली चुनौती अब सड़क, पुल, व्यापार और अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की है।
राहत के साथ पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती
नेपाल सरकार को देश के भीतर और विदेशों से प्रधानमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहयोग मिल रहा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि भारत, चीन समेत कई देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकास संस्थाओं से सहायता प्राप्त हो रही है।
प्रारंभिक नुकसान के आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं। नेपाल सरकार समानांतर रूप से विस्तृत Post Disaster Needs Assessment (PDNA) कर रही है, जिससे पुनर्निर्माण की वास्तविक लागत और जरूरतों का विस्तृत आकलन सामने आएगा।
बाढ़ का पानी भले धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन नेपाल के सामने अब सड़क से लेकर व्यापार और बिजली से लेकर रोजगार तक पूरी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है।
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