पटना: बिहार में लागू शराबबंदी के 10 साल पूरे होने के बीच एक नई अध्ययन रिपोर्ट ने राज्य की सबसे चर्चित नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट का दावा है कि शराबबंदी से न तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपेक्षित कमी आई और न ही अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह लगाम लग सकी। उल्टा राज्य को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। भाजपा ने समीक्षा की बात कही है, जबकि राजद ने भी शराबबंदी के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाए हैं।
10 साल बाद क्या कहती है रिपोर्ट?
नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि अब इतने वर्षों का डेटा उपलब्ध है जिससे नीति के प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक शराबबंदी के बाद अवैध शराब, तस्करी और अन्य नशीले पदार्थों का नेटवर्क नई चुनौती बनकर उभरा है।
सरकार का खजाना भी हुआ प्रभावित
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि नियंत्रित और लाइसेंस आधारित शराब बिक्री व्यवस्था लागू की जाए तो बिहार के अपने राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी के कारण राज्य को हर साल बड़े पैमाने पर आबकारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भाजपा बोली- रिपोर्ट की होगी समीक्षा
भाजपा के बिहार प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि पार्टी विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों की समीक्षा करती है। नई रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं का भी अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।
राजद ने भी उठाए सवाल
राजद नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि शराबबंदी को बिना व्यापक सर्वे और जमीनी अध्ययन के लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावों का गंभीर मूल्यांकन होना चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
बहस के केंद्र में बिहार मॉडल
एक दशक पहले महिलाओं और सामाजिक संगठनों की मांग पर लागू हुई शराबबंदी को बिहार सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती रही है। लेकिन अब नई रिपोर्ट ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या शराबबंदी अपने मूल उद्देश्यों को हासिल कर पाई या फिर इससे नई समस्याएं पैदा हुईं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति और नीतिगत बहस के केंद्र में रहने वाला है।
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