रामगढ़: सपने अगर बड़े हों तो रास्ते की मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं। झारखंड के ग्रामीण इलाके से निकलने वाली युवा खिलाड़ी अंजना कुमारी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जॉर्जिया में भारत का तिरंगा थामकर उतरी अंजना ने अंतरराष्ट्रीय वुशु चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीतकर देश और झारखंड का मान बढ़ाया है।
विदेशी धरती पर दम, दो स्पर्धाओं में पदक
30 जुलाई से 4 अगस्त तक जॉर्जिया में आयोजित बातुमी इंटरनेशनल वुशु चैंपियनशिप-2026 में अंजना ने डबल डैगर और विनचुन स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। दोनों स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
एक ही प्रतियोगिता में दो पदक जीतना अंजना की मेहनत और खेल के प्रति उनके समर्पण को दिखाता है।
ग्रामीण झारखंड की बेटी, अंतरराष्ट्रीय पहचान
अंजना की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी शुरुआत झारखंड के ग्रामीण परिवेश से हुई। स्थानीय स्तर पर मेहनत और अभ्यास करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया।
आज जॉर्जिया में उनके प्रदर्शन ने यह संदेश दिया है कि प्रतिभा को अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो गांव की बेटी भी दुनिया के मंच पर तिरंगा लहरा सकती है।
पीछे परिवार और प्रशिक्षकों का साथ
अंजना की सफलता के पीछे उनके परिवार और प्रशिक्षकों की मेहनत रही। वहीं बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड (BFCL) ने भी उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए आवश्यक सहयोग और अवसर उपलब्ध कराया।
BFCL ने अंजना की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उनके उज्ज्वल खेल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
दो कांस्य… लेकिन हौसला सोने से कम नहीं
अंजना ने भले ही दो कांस्य पदक जीते हों, लेकिन उनकी यह उपलब्धि झारखंड की उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए किसी स्वर्णिम कहानी से कम नहीं है। गांव से जॉर्जिया तक का यह सफर अब दूसरे खिलाड़ियों के सपनों को भी नई उड़ान देने वाला है।
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