सीतामढ़ी: माता जानकी की जन्मभूमि पुनौराधाम को भव्य धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंदिर निर्माण को लेकर बड़ी समय-सीमा तय करते हुए कहा है कि 31 दिसंबर 2028 तक माता जानकी का भव्य मंदिर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य गर्भगृह में विराजमान भगवान श्रीराम और माता जानकी की प्रतिमाओं को विधि-विधान के साथ अस्थायी काष्ठ मंडपम में स्थानांतरित कर दिया गया है।
प्रतिमाओं के स्थानांतरण के बाद अब मुख्य मंदिर के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की तैयारी है। निर्माण के दौरान श्रद्धालुओं के लिए काष्ठ मंडपम में ही दर्शन-पूजन की व्यवस्था रहेगी। इससे निर्माण कार्य के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और पूजा-पाठ का सिलसिला भी जारी रहेगा।
882 करोड़ की परियोजना से होगा पुनौराधाम का कायाकल्प
पुनौराधाम के विकास के लिए करीब 882 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की गई है। इस योजना का उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पुनौराधाम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
परियोजना के तहत मंदिर परिसर के विकास के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, आधारभूत संरचना, परिसर का सौंदर्यीकरण और अन्य आवश्यक सुविधाओं को विकसित किया जाना है। योजना पूरी होने के बाद पुनौराधाम में देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
एक साल पहले शाह और नीतीश ने किया था भूमि पूजन
माता जानकी की जन्मभूमि को भव्य स्वरूप देने की इस महत्वाकांक्षी योजना का भूमि पूजन करीब एक साल पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से किया था। इसके बाद से पुनौराधाम के विकास की दिशा में तैयारियां आगे बढ़ाई जा रही हैं।
अब मंदिर निर्माण के अगले चरण में मुख्य गर्भगृह की प्रतिमाओं को काष्ठ मंडपम में स्थानांतरित किया गया है। इसे निर्माण कार्य शुरू होने से पहले की महत्वपूर्ण प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
निर्माण के बीच भी जारी रहेगा दर्शन-पूजन
मंदिर निर्माण के कारण श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अस्थायी काष्ठ मंडपम तैयार किया गया है। भगवान श्रीराम और माता जानकी की प्रतिमाओं को यहां स्थापित किए जाने के बाद श्रद्धालु पहले की तरह दर्शन और पूजा कर सकेंगे।
यानी एक तरफ भव्य मंदिर निर्माण की नींव पर काम आगे बढ़ेगा तो दूसरी तरफ भक्तों के लिए पूजा और दर्शन की व्यवस्था भी जारी रहेगी।
अयोध्या की तर्ज पर धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी
पुनौराधाम को अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर परिसर की तर्ज पर बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका मकसद माता जानकी की जन्मभूमि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है।
मंदिर निर्माण के साथ पूरे क्षेत्र के विकास से स्थानीय लोगों को भी रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी फायदा पहुंच सकता है।
2028 की डेडलाइन, अब निर्माण पर टिकी नजर
मुख्यमंत्री की ओर से 31 दिसंबर 2028 तक मंदिर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किए जाने के बाद अब परियोजना की प्रगति पर नजर रहेगी। काष्ठ मंडपम में प्रतिमाओं का स्थानांतरण यह संकेत देता है कि मुख्य मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी पूरी हो रही है।
माता जानकी की जन्मभूमि पर बनने वाला यह भव्य मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं होगा, बल्कि सीतामढ़ी की पहचान को नई ऊंचाई देने वाली परियोजना के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में पुनौराधाम का स्वरूप कितना बदलता है और 2028 की तय समय-सीमा में मंदिर कितना भव्य आकार लेता है, इस पर श्रद्धालुओं के साथ पूरे बिहार की नजर रहेगी।
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