लखीसराय: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई के महीनों बाद लखीसराय में पूर्व जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र के कार्यकाल से जुड़ी शस्त्र अनुज्ञप्तियों की फाइल एक बार फिर खुल गई है। वर्तमान जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने पूर्व डीएम के कार्यकाल में जारी किए गए 25 शस्त्र लाइसेंसों की पुलिस जांच से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट लखीसराय के पुलिस अधीक्षक से मांगी है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद उन शस्त्र लाइसेंसों को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी के कार्यकाल में जारी किया गया था। अब पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह देखा जाएगा कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
8 अप्रैल की EOU कार्रवाई के बाद से मामला चर्चा में
बताया जाता है कि बीते 8 अप्रैल 2026 को आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र का अचानक स्थानांतरण हुआ था। इसके बाद जिले के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई थी।
EOU की टीम ने तत्कालीन डीएम कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण शाखाओं और विभागों से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे। इनमें शस्त्र अनुज्ञप्ति शाखा, स्थापना शाखा, जिला खेल एवं कला-संस्कृति विभाग, म्यूजियम, शिक्षा, पर्यटन और पुरातत्व विभाग समेत कई कार्यालयों की फाइलें शामिल होने की बात सामने आई थी।
अब उन्हीं पुराने मामलों में शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी फाइलों पर प्रशासनिक स्तर से दोबारा नजर पड़ती दिखाई दे रही है।
25 लाइसेंसों की जांच रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण?
वर्तमान जिलाधिकारी की ओर से एसपी को भेजे गए पत्र में पूर्व डीएम के कार्यकाल में जारी 25 शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में पुलिस द्वारा की गई जांच की विस्तृत आख्या मांगी गई है।
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित आवेदकों के संबंध में पुलिस सत्यापन कैसे हुआ था, क्या आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की गई थी और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में निर्धारित प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की बात सामने नहीं आई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
थानाध्यक्ष के निलंबन से भी जुड़ता है मामला
इस पूरे प्रकरण में लखीसराय टाउन थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील कुमार सहनी भी कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। उन पर अपराध में संलिप्त बताए जा रहे व्यक्तियों को शस्त्र अनुज्ञप्ति जारी करने की अनुशंसा किए जाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया।
ऐसे में 25 शस्त्र लाइसेंसों की जांच रिपोर्ट तलब किए जाने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
EOU की जांच में क्या निकलेगा, इस पर नजर
EOU की ओर से तत्कालीन डीएम के कार्यकाल से संबंधित कई विभागों की फाइलें खंगाले जाने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर शस्त्र लाइसेंसों की जांच की कवायद सामने आई है।
इन फाइलों में क्या तथ्य सामने आते हैं और 25 लाइसेंसों की पुलिस जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकलता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल लखीसराय में एक सवाल फिर चर्चा में है—पूर्व डीएम के कार्यकाल में जारी हुए इन 25 शस्त्र लाइसेंसों की कहानी आखिर क्या है? इसका जवाब पुलिस की विस्तृत जांच रिपोर्ट और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई से सामने आएगा।
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