शेखपुरा: डाकघर का नाम सुनते ही आमतौर पर चिट्ठी, पार्सल और मनीऑर्डर याद आता है, लेकिन सावन के पवित्र महीने में शेखपुरा में डाक विभाग ने अपनी सेवाओं में भक्ति का रंग भी जोड़ दिया है। अब यहां डाकघर से सिर्फ जरूरी सामान नहीं, बल्कि गंगोत्री का पवित्र गंगाजल भी खरीदा जा सकता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए भारतीय डाक विभाग की ओर से बोतलबंद गंगाजल उपलब्ध कराया जा रहा है। 250 एमएल की बोतल की कीमत 30 रुपये निर्धारित की गई है। यानी श्रद्धालुओं को गंगाजल के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं होगी।
डाकघर बना आस्था का नया ठिकाना
नवादा प्रमंडल के डाक अधीक्षक अरविंद कुमार और शेखपुरा अनुमंडलीय सहायक डाक अधीक्षक भूषण प्रसाद सिन्हा ने बताया कि विभाग जनसेवा के साथ धार्मिक आस्था से जुड़ी सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है।
शेखपुरा मुख्य डाकघर सहित अन्य डाकघरों में श्रद्धालुओं को निर्धारित कीमत पर गंगोत्री का गंगाजल दिया जा रहा है।
सोमवारी को मंदिर परिसर में भी पहुंचेगा गंगाजल
डाक विभाग की पहल सिर्फ डाकघर तक सीमित नहीं है। सावन की सोमवारी को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रमुख शिव मंदिरों में भी स्टॉल लगाया जाएगा।
बरबीघा के पंचबदन स्थान और गिरिहिंडा पहाड़ स्थित बाबा कामेश्वर नाथ शिव मंदिर परिसर में डाक विभाग की ओर से स्टॉल लगाकर गंगोत्री का गंगाजल उपलब्ध कराया जाएगा।
इससे मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु वहीं से गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकेंगे।
30 रुपये में 250 एमएल की बोतल
शेखपुरा मुख्य डाकघर के पोस्टमास्टर महताब खान ने बताया कि विभाग की ओर से 250 एमएल की बोतल में गंगोत्री का गंगाजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसकी कीमत 30 रुपये रखी गई है।
गंगाजल खरीदने पहुंचे श्रद्धालुओं ने डाक विभाग की इस पहल की सराहना की। प्रीतम कुमारी, शशांक शेखर, गीतमाला देवी, आनंद कुमार और शिवानी प्रिया समेत अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए गंगाजल आसानी से मिलना सुविधाजनक है।
चिट्ठियों से आस्था तक… बदलता दिखा डाकघर
डाक विभाग की यह पहल इसलिए भी खास है क्योंकि कभी लोगों तक चिट्ठियां पहुंचाने वाला डाकघर अब श्रद्धालुओं की धार्मिक जरूरत में भी भागीदार बन रहा है।
सावन में जब शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, ऐसे में डाकघर के जरिए गंगाजल उपलब्ध कराने की पहल परंपरागत डाक सेवा और आधुनिक जनसुविधा के बीच एक अनोखा मेल बनकर सामने आई है।
अब सवाल चिट्ठी पहुंचने का नहीं, बल्कि आस्था की एक छोटी-सी बोतल को भक्त के हाथ तक पहुंचाने का भी है।
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