पटना: तीन रात बेउर जेल में बिताने के बाद जैसे ही तेज प्रताप यादव बाहर निकले, बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई। छात्र आंदोलन, गिरफ्तारी और FIR वापसी के बीच अब कहानी सिर्फ एक नेता की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच नई राजनीतिक जंग का संकेत भी दे रही है।
तेज प्रताप यादव को बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया गया था। सरकार के 64 FIR वापस लेने के फैसले के बाद उन्हें राहत मिली और मंगलवार शाम वह जेल से बाहर आए।
गिरफ्तारी से रिहाई तक… 72 घंटे में बदला पूरा समीकरण
तेज प्रताप की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों और आंदोलनकारियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया था। वहीं सरकार का कहना था कि कार्रवाई हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ की गई।
लेकिन जैसे ही सरकार ने मुकदमे वापस लेने का फैसला लिया, राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए। तेज प्रताप की रिहाई के साथ अब सैकड़ों छात्रों के जेल से बाहर आने का रास्ता भी साफ हो गया है।
तेज प्रताप की चुप्पी, लेकिन सियासी संदेश बड़ा
बेउर जेल से निकलने के बाद तेज प्रताप यादव सीधे लालू यादव और राबड़ी देवी से मिलने पहुंचे। मीडिया के सवालों पर उन्होंने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी रिहाई ने राजद खेमे में नई ऊर्जा जरूर भर दी है।
अब सवाल यह है कि क्या छात्र आंदोलन का मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा हथियार बनेगा?
छात्रों की रिहाई बनेगा विपक्ष का मुद्दा?
आंदोलन में गिरफ्तार हुए कई छात्र अब रिहा होंगे। विपक्ष इसे छात्रों की जीत बता रहा है, जबकि सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया फैसला बता रही है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या बिहार में छात्र आंदोलन अब चुनावी राजनीति का नया मुद्दा बनने जा रहा है?
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