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Jharkhand: बोकारो में ‘नो दहेज’ शादी का बड़ा संदेश, बैलगाड़ी में निकली बारात, कुड़माली धुन पर झूमे बराती!

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के कसमार प्रखंड से एक ऐसी शादी की कहानी सामने आई है, जिसने दिखावे और...

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के कसमार प्रखंड से एक ऐसी शादी की कहानी सामने आई है, जिसने दिखावे और खर्चीले ट्रेंड के बीच सादगी की एक मजबूत मिसाल पेश कर दी। तेलियाडीह टांगटोना निवासी शिव महतो के बेटे जनार्दन कुमार महतो की शादी मुंगो बगदा की श्वेता कुमारी के साथ पूरे पारंपरिक अंदाज में संपन्न हुई, लेकिन इस शादी को खास बना दिया उस एक फैसले ने—न दहेज लिया गया और न ही लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ।

दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकला। फूलों और पारंपरिक सजावट से सजी बैलगाड़ी जैसे ही गांव की गलियों से गुजरी, लोग घरों से बाहर निकल आए। हर कोई इस अनोखी बारात को देखने के लिए उत्साहित नजर आया। पीछे-पीछे बराती कुड़माली लोकधुनों पर झूमते, गाते और नाचते हुए पैदल ही बगदा गांव तक पहुंचे। पूरे रास्ते में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

इस आयोजन को खास बनाने में गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मंजूरा के मिथिलेश महतो ने बैलगाड़ी को रंग-रोगन कर नया रूप दिया, जबकि डुमरकुदर के भुवनेश्वर महतो और उनके साथियों ने फूलों और पारंपरिक सामग्री से उसे बेहद आकर्षक ढंग से सजाया। सजी-धजी बैलगाड़ी इस शादी की सबसे बड़ी पहचान बन गई।

बरसों बाद इलाके में निकली इस तरह की पारंपरिक बारात ने लोगों को पुराने दौर की याद दिला दी। बारात पूरी तरह कुड़माली संस्कृति में रंगी हुई थी—घोड़ा नाच, लोकगीत और पारंपरिक वेशभूषा ने माहौल को जीवंत कर दिया। स्थानीय लोग भी खुद को रोक नहीं पाए और इस अनोखी पहल का हिस्सा बनते चले गए।

दूल्हा और दुल्हन ने साफ शब्दों में कहा कि शादी एक पवित्र संस्कार है, इसे लेन-देन या सौदेबाजी का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह की सादगीपूर्ण और दहेज-मुक्त शादियां समाज को सही दिशा देती हैं और हमारी लोक संस्कृति को जिंदा रखती हैं।

पूरे विवाह की रस्में कुड़माली समाज के पारंपरिक नेगचार के अनुसार पूरी की गईं। न कोई दिखावा, न कोई फिजूलखर्ची—बस परंपरा, संस्कार और अपनापन। आज जब शादियों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, ऐसे समय में बोकारो की यह शादी एक नई सोच के साथ सामने आई है।

यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है—कि खुशियां दिखावे में नहीं, बल्कि सादगी और संस्कार में बसती हैं।

Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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