रांची: नगर निगम के टाउन प्लानिंग सेक्शन में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला कडरू स्थित न्यू एजी कॉलोनी का है, जहां आरोप है कि एक ही इलाके में तीन महीने के अंतराल में दो अलग-अलग नक्शे पास किए गए और दूसरे नक्शे में वार्ड नंबर ही बदल दिया गया।
मामला सामने आने के बाद अब नगर निगम की कार्यप्रणाली और नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, न्यू एजी कॉलोनी स्थित एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा मार्च में वार्ड-25 के तहत स्वीकृत किया गया था। इसके करीब तीन महीने बाद जून में उसी क्षेत्र के दूसरे ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा पास हुआ, लेकिन इसमें वार्ड नंबर 26 दर्ज कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन, होल्डिंग और क्षेत्र एक ही है तो वार्ड नंबर बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
आरटीआई एक्टिविस्ट रौनक राज ने इस मामले को लेकर नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट के नक्शों की जांच की जाए तो कई गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नक्शा पास कराने में सुविधा के लिए वार्ड बदलने और लैंड यूज में बदलाव जैसे मामले सामने आ रहे हैं। आरोप है कि कई बार नियमों को अपने हिसाब से इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है।
मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण के नक्शे कैसे स्वीकृत हो रहे हैं।
वहीं, नगर निगम आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि नक्शा पास करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। उन्होंने कहा कि वार्ड बदलने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
अब जांच के बाद ही साफ होगा कि यह सिर्फ तकनीकी गलती थी या फिर नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में कोई बड़ा खेल चल रहा था। फिलहाल एक जमीन पर दो बार नक्शा और वार्ड बदलाव का मामला रांची नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।