सुपौल: अभी मानसून ने ठीक से दस्तक भी नहीं दी, लेकिन पहली ही हल्की बारिश ने सुपौल जिले में विकास कार्यों और प्रशासनिक तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। एक तरफ करोड़ों की लागत से बन रहे पुल का डायवर्सन बह गया, तो दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर पानी ने कब्जा जमा लिया।
3.2 करोड़ का प्रोजेक्ट, पहली बारिश में फेल
राघोपुर प्रखंड के करजाइन पंचायत स्थित बसावनपट्टी वार्ड-4 में करीब 3.20 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण के दौरान लोगों की आवाजाही के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन पहली ही बारिश में बह गया। नतीजा—हजारों लोगों की आवाजाही ठप और करीब 100 परिवारों का मुख्य सड़क से संपर्क लगभग कट गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले महीने ही काम शुरू हुआ था, लेकिन इतनी जल्दी डायवर्सन का बह जाना निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज, महिलाएं और किसान—सभी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों तक ट्रैक्टर नहीं पहुंच पा रहे, जिससे खेती भी प्रभावित हो रही है।
प्रशासन का आश्वासन, लोगों का गुस्सा
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और मजबूत वैकल्पिक डायवर्सन बनाने की बात कही है। वहीं एसडीएम ने संबंधित विभाग को तुरंत मरम्मत कर आवागमन बहाल करने का निर्देश दिया है।
शहर भी डूबा—सड़क या तालाब? पहचान मुश्किल
उधर सुपौल शहर में हल्की बारिश ने नगर परिषद की तैयारियों की भी पोल खोल दी। लोहिया नगर चौक से गजना चौक, ऑफिसर कॉलोनी रोड, गांधी द्वार से अनुमंडल कार्यालय मार्ग और जज कॉलोनी तक—कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं।
सड़क और नाले का फर्क खत्म हो गया, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया। दोपहिया वाहन फिसलते नजर आए, वहीं पैदल चलने वालों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा।
हर साल वही कहानी, सिर्फ वादे नए
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल मानसून में यही हाल होता है, लेकिन नगर परिषद सिर्फ दावे करती है। नालों की सफाई समय पर नहीं होती और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए, वरना आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
सवाल वही—बारिश दोषी या सिस्टम?
पहली बारिश ने ही बता दिया कि तैयारी कितनी ‘मजबूत’ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है या अगली बारिश में हालात और बिगड़ते हैं।
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