शेखपुरा: दिल्ली के जंतर-मंतर पर वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में शेखपुरा में भी राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। रविवार को शहर के दल्लू चौक पर भाकपा माले, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) की संयुक्त गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखे सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
गोष्ठी में भाकपा माले के जिला सचिव विजय कुमार विजय, माले नेता कमलेश प्रसाद, AISA के जिला संयोजक मो. रिक्की खान, RYA के जिला संयोजक प्रवीण सिंह कुशवाहा सहित छात्र रवि कुमार पासवान, शुभम कुमार पासवान और प्रदीप कुमार समेत अन्य लोग शामिल हुए।
‘आंदोलनकारियों को रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला’
गोष्ठी को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव विजय कुमार विजय ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने पहुंचे छात्र-नौजवानों, बुद्धिजीवियों, किसानों और मजदूरों के खिलाफ केंद्र सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों को विभिन्न स्थानों पर रोका गया और पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और उन्हें घसीटने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
विजय कुमार विजय ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए रास्तों और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस आंदोलन को आगे बढ़ाएगी और सरकार के कथित दमन के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी।
ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
माले नेता कमलेश प्रसाद ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
कमलेश प्रसाद ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद चुनाव आयोग की व्यवस्था का हिस्सा है और आयोग के भीतर संस्थागत प्रक्रिया तथा सामूहिक निर्णय की अहम भूमिका होती है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ कथित फैसलों पर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों और रिपोर्ट के निष्कर्षों की पुष्टि के लिए संबंधित मूल रिपोर्ट तथा चुनाव आयोग का पक्ष देखना जरूरी है।
AISA और RYA ने भी केंद्र सरकार पर साधा निशाना
AISA के जिला संयोजक मो. रिक्की खान और RYA के जिला संयोजक प्रवीण सिंह कुशवाहा ने संयुक्त बयान जारी कर दिल्ली में आंदोलनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्र-नौजवानों को प्रदर्शन के दौरान बेवजह हिरासत में लिया जा रहा है और उन्हें कानूनी मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई से युवाओं के अधिकार और भविष्य प्रभावित होते हैं।
नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं करेगी।
ये आरोप राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। इस संबंध में केंद्र सरकार और पुलिस का पक्ष सामने आने पर पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
13 अक्टूबर को पटना राजभवन मार्च में जुटने की अपील
गोष्ठी के दौरान नेताओं ने आगामी 13 अक्टूबर 2026 को पटना में प्रस्तावित राजभवन मार्च को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने शेखपुरा जिले के छात्र-नौजवानों से बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होने का आह्वान किया।
वक्ताओं का कहना था कि वोट चोरी के आरोपों, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और दिल्ली में आंदोलनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई जैसे मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना जरूरी है। इसी उद्देश्य से जिले में छात्र-युवाओं को संगठित करने पर जोर दिया गया।
नेताओं ने कहा कि शेखपुरा से अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, मार्च में वास्तविक भागीदारी कितनी होगी, यह आयोजन के दिन ही स्पष्ट होगा।
शेखपुरा में तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां
दल्लू चौक पर आयोजित इस संयुक्त गोष्ठी के जरिए भाकपा माले, AISA और RYA ने दिल्ली के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। कार्यक्रम में चुनाव आयोग की भूमिका, लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्र-नौजवानों के मुद्दों पर चर्चा हुई।
अब सभी की नजर 13 अक्टूबर को पटना में प्रस्तावित राजभवन मार्च पर है। शेखपुरा के इन संगठनों ने इसमें बड़ी भागीदारी का लक्ष्य रखा है। आने वाले दिनों में जिले में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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