सहरसा: बिहार के सहरसा में स्वास्थ्य विभाग का एक सरकारी कार्यालय उस समय विवादों में आ गया, जब जिले के सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद पर एक कर्मी ने थप्पड़ मारने और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा दिया। मामला अक्टूबर महीने के डाटा एंट्री ऑपरेटरों की उपस्थिति से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर कराने और उपस्थिति रजिस्टर की मांग को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। आरोप लगाने वाले डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर समीर कुमार गुप्ता ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। वहीं, सिविल सर्जन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी तरह की मारपीट से इनकार किया है।
इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के कामकाज और सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों एवं कर्मियों के बीच व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, फिलहाल मामला दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों तक सीमित है और किसी औपचारिक शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है।
फाइल पर हस्ताक्षर कराने पहुंचे थे समीर, रजिस्टर को लेकर शुरू हुआ विवाद
आरोप लगाने वाले समीर कुमार गुप्ता उर्मिला प्राइवेट लिमिटेड में डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत हैं। उनके अनुसार, वह अक्टूबर महीने के डाटा एंट्री ऑपरेटरों की उपस्थिति से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर कराने सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने उनसे संबंधित उपस्थिति रजिस्टर की मांग की।
समीर का कहना है कि रजिस्टर को लेकर बातचीत के दौरान दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। उनका आरोप है कि बात बढ़ने पर सिविल सर्जन नाराज हो गए और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने को कहा। इसी दौरान विवाद ने दूसरा रूप ले लिया।
कुर्सी से उठे सिविल सर्जन और जड़ दिया थप्पड़! कर्मी का दावा
समीर कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया कि सिविल सर्जन अपनी कुर्सी से उठे और उपस्थिति रजिस्टर वापस मांगने के क्रम में उन्हें थप्पड़ मार दिया। उन्होंने मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप लगाए।
समीर के इस दावे के बाद मामला चर्चा में आ गया है। एक सरकारी कार्यालय में अधिकारी और कर्मी के बीच इस तरह के विवाद का आरोप लगना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, घटना के संबंध में फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि या किसी जांच रिपोर्ट की जानकारी सामने नहीं आई है।
सिविल सर्जन ने पलटवार करते हुए आरोपों को बताया निराधार
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने समीर कुमार गुप्ता के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि समीर को केवल बातचीत के लिए बुलाया गया था और उनसे संबंधित फाइल मांगी गई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी ओर से किसी प्रकार की धक्का-मुक्की, मारपीट या थप्पड़ मारने की घटना नहीं हुई है।
इस तरह एक ही घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के बयान बिल्कुल अलग-अलग हैं। एक ओर कर्मी थप्पड़ मारने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर जिले के सिविल सर्जन इसे निराधार बता रहे हैं।
न थाने में शिकायत, न विभागीय जांच की पुष्टि; आगे क्या होगा?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खबर लिखे जाने तक समीर कुमार गुप्ता की ओर से किसी थाने या संबंधित विभागीय अधिकारी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराने की पुष्टि नहीं हुई थी। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने को लेकर विचार किए जाने की बात कही है।
अब सवाल उठता है कि क्या समीर कुमार गुप्ता इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे? क्या स्वास्थ्य विभाग दोनों पक्षों का बयान लेकर मामले की जांच करेगा? और यदि शिकायत आती है तो आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
फिलहाल सहरसा के स्वास्थ्य विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलना चाहिए।
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सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट…