बेतिया: बिहार की लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की अनूठी झलक पश्चिम चम्पारण जिले के योगापट्टी प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय कोहड़ा में देखने को मिली। भवानीपुर पंचायत के इस विद्यालय में गुरुवार को छठ महापर्व अनोखे अंदाज में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में ही टेंट लगाकर छठ घाट तैयार किया गया, जहां छात्राओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य की उपासना की।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने पढ़ाई के माहौल को कुछ समय के लिए लोक आस्था और भक्ति के रंग में रंग दिया। छात्राओं ने पूरे श्रद्धाभाव से छठ पूजा की परंपराओं को निभाया। इस अनूठे आयोजन को देखने वाले शिक्षकों और विद्यालय परिवार के लोगों ने भी इसकी सराहना की।
स्कूल परिसर में बना छठ घाट, परंपराओं से जुड़ीं छात्राएं
कार्यक्रम के लिए विद्यालय परिसर में विशेष व्यवस्था की गई थी। टेंट लगाकर छठ घाट का स्वरूप तैयार किया गया, जहां छात्राओं ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा की। पुष्पांजलि कुमारी, अनीता कुमारी, कृतिका कुमारी, ममता कुमारी, रोशनी कुमारी, सलोनी कुमारी, खुशबू कुमारी और निर्मा कुमारी सहित सैकड़ों छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराना भी था। छात्र-छात्राओं को छठ महापर्व के धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विद्यालय में आयोजित छठ पूजा के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि यह महापर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि स्वच्छता, अनुशासन, त्याग, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकता का भी संदेश देता है। सूर्य और जल की उपासना के जरिए प्रकृति के प्रति सम्मान तथा पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा मिलती है।
प्रधानाध्यापक शिव कुमार सिंह ने कहा कि छठ महापर्व हमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान का भाव रखना सिखाता है। भगवान सूर्य और जल की उपासना के माध्यम से यह पर्व प्रकृति के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों से अपने आसपास साफ-सफाई रखने, नदी-तालाब और अन्य जलस्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने तथा अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की।
शिक्षकों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक जुगल किशोर प्रसाद, सुरेश प्रसाद गुप्ता और प्रदीप कुमार सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-कर्मियों का सराहनीय योगदान रहा। शिक्षकों ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। इससे उनमें अपनी परंपराओं के प्रति गर्व के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना भी विकसित होती है।
विद्यालय में छठ महापर्व का यह आयोजन बच्चों के लिए एक अलग तरह का अनुभव रहा। यहां छात्राओं ने पूजा-अर्चना के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझा और लोक आस्था के इस महान पर्व के संदेशों को आत्मसात किया।
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बेतिया से अजय शर्मा की रिपोर्ट…