पटना: बांकीपुर उपचुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक की सभी इकाइयों को भंग कर दिया है। पार्टी के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने गुरुवार को कार्यालय आदेश जारी कर प्रदेश, जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की। इसके साथ ही पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों और संबद्ध संगठनों को भी भंग कर दिया गया है।
बताया गया है कि यह फैसला राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। पार्टी ने पुराने संगठनात्मक आदेश को भी निरस्त कर दिया है और अब बिहार में आरजेडी नए सिरे से संगठन का ढांचा तैयार करेगी।
बांकीपुर हार के बाद मंथन, संगठन में बदलाव की शुरुआत
बांकीपुर उपचुनाव में आरजेडी प्रत्याशी रेखा गुप्ता को मिली हार और जमानत जब्त होने के बाद पार्टी के अंदर सवाल उठने लगे थे। चुनाव परिणाम के बाद कई नेताओं ने संगठन की कमजोरी, कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और चुनावी रणनीति को लेकर नाराजगी जताई थी।
मनेर विधायक भाई वीरेंद्र द्वारा पार्टी के कुछ नेताओं पर सवाल उठाए जाने के बाद आरजेडी के अंदर चल रही खींचतान भी सामने आई थी। ऐसे समय में संगठन भंग करने का फैसला पार्टी के अंदर बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
तेजस्वी की नजर नए समीकरणों पर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरजेडी अब नए सामाजिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए संगठन का पुनर्गठन कर सकती है। पार्टी की कोशिश ऐसे चेहरों को आगे लाने की हो सकती है, जो बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत कर सकें।
बिहार की राजनीति में सवर्ण वोटरों को लेकर भी नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि आरजेडी अब अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ दूसरे वर्गों में भी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रदेश से पंचायत तक बदले जाएंगे चेहरे
आरजेडी के फैसले के बाद अब जिला अध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों और पंचायत स्तर के पदाधिकारियों की जगह नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है। पार्टी जल्द ही नई संगठनात्मक संरचना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
बांकीपुर की हार के बाद लिया गया यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि तेजस्वी यादव की आगामी चुनावी रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि नए संगठन के जरिए आरजेडी अपनी खोई राजनीतिक जमीन को कितना मजबूत कर पाती है।
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