रांची: रांची के प्रतिष्ठित रिम्स (RIMS) में फर्जी प्रमाण पत्र और टेंडर गड़बड़ी मामले में CID की जांच तेज हो गई है। अब एजेंसी ने 4 छात्रों के नामांकन पर सीधा जवाब मांगा है, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
किन छात्रों पर सवाल?
CID ने MBBS के तीन—काजल कुमारी, आशीष कुमार, पप्पू कुमार—और BDS की छात्रा ओली विश्वकर्मा के एडमिशन की जांच शुरू की है। इनके जाति और दिव्यांग प्रमाण पत्र की सत्यता की पड़ताल के लिए दस्तावेज संबंधित जिलों में भेजे गए हैं।
टेंडर घोटाले की भी खुल रही परतें
सिर्फ एडमिशन ही नहीं, बल्कि रिम्स में सफाई और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के टेंडर पर भी CID की नजर है। आरोप है कि 2025 में तकनीकी और वित्तीय रूप से अयोग्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की तीन कंपनियों को ठेका दे दिया गया।
पूर्व निदेशक पर भी सवाल
जिस वक्त ये टेंडर पास हुआ, उस समय रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार थे। CID छापेमारी के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। अब जांच की आंच और तेज हो गई है।
आगे क्या?
अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो CID इस मामले में बड़ा केस दर्ज कर सकती है। रिम्स की साख पर अब सीधा संकट मंडरा रहा है।