रांची: रांची के धुर्वा स्थित लाइट हाउस प्रोजेक्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले फ्लैट अब “किराया कमाने का जरिया” बन गए हैं। खुलासा हुआ है कि 300 से ज्यादा लाभुकों ने खुद रहने के बजाय अपने फ्लैट 5 से 7 हजार रुपए महीने पर किराए पर चढ़ा दिए। मामला सामने आते ही नगर निगम ने सख्ती दिखाते हुए 232 आवंटियों को नोटिस थमा दिया है।
निगम ने साफ कहा है—24 घंटे के अंदर फ्लैट में खुद रहने का प्रमाण दो, नहीं तो आवंटन रद्द होगा और जमा पैसा भी जब्त कर लिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद लाइट हाउस में हड़कंप मच गया है। कई लोग आनन-फानन में किरायेदारों को निकालकर खुद शिफ्ट होने लगे हैं।
यह पूरा प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तैयार किया गया था, जिसमें करीब 131 करोड़ की लागत से 1008 फ्लैट बनाए गए हैं। हर फ्लैट की कीमत 13.29 लाख रुपए है, जिसमें सरकार ने 6.5 लाख तक सब्सिडी दी है। मकसद था गरीबों को छत देना, लेकिन अब यही फ्लैट कमाई का साधन बनते दिख रहे हैं।
मामला सिर्फ किराए तक सीमित नहीं है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि कई लोगों ने बिना रजिस्ट्री के ही सादे कागज पर फ्लैट बेचने की डील कर दी। जमीन के कागजात पूरे नहीं होने के कारण अब तक एक भी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हो पाई है, फिर भी खरीद-बिक्री का खेल जारी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई फ्लैटों में किराने की दुकान, खिलाड़ियों का ठहराव, यहां तक कि अवैध गतिविधियां भी चल रही हैं, जिससे वहां रहने वाले परिवार परेशान हैं।
नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने साफ कर दिया है कि अब प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी फ्लैटों की जांच होगी और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।