पटना: गंभीर चोट के मामले में आरोपी को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मिली नियमित जमानत को रद्द करते हुए आरोपी धर्मेंद्र कुमार को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। साथ ही, जिस न्यायिक अधिकारी ने जमानत का आदेश पारित किया था, उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू करने का आदेश भी दिया गया है।
मामला दीघा थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के केस से जुड़ा है। आरोप है कि धर्मेंद्र कुमार ने पिस्तौल से गोली चलाकर मुकेश उर्फ गोपी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस संबंध में दीघा थाना कांड संख्या 340/2024 दर्ज की गई थी।
इंज्यूरी रिपोर्ट से अलग आधार पर दी गई थी जमानत
जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने श्याम सुंदरी देवी की ओर से दायर जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश पर गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस आधार पर आरोपी को जमानत दी गई, वह पुलिस केस डायरी और चार्जशीट में मौजूद मेडिकल रिपोर्ट के तथ्यों से मेल नहीं खाता।
पीड़ित की इंज्यूरी रिपोर्ट में चोट को गंभीर प्रकृति का बताया गया था और रिपोर्ट पीएमसीएच के चिकित्सकों से संबंधित थी। हाईकोर्ट ने इसी बिंदु को जमानत आदेश की समीक्षा में महत्वपूर्ण माना।
जिस दिन सुनवाई नहीं थी, उसी दिन कैसे मिली बेल?
मामले में हाईकोर्ट ने जमानत आदेश की तारीख को लेकर भी गंभीर सवाल उठाया। कोर्ट के मुताबिक, 22 जुलाई 2024 को आरोपी की नियमित जमानत अर्जी की सुनवाई निर्धारित नहीं थी, इसके बावजूद उसी दिन उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया गया।
हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों में उस तारीख को जमानत का आदेश पारित किया गया।
43 पन्नों के फैसले में कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने अपने 43 पन्नों के फैसले में मामले के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की। कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में दर्ज तथ्यों और पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद मेडिकल रिपोर्ट के बीच अंतर को गंभीरता से लिया।
हाईकोर्ट ने धर्मेंद्र कुमार को दी गई नियमित जमानत रद्द करते हुए उसे दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। तय अवधि में आत्मसमर्पण नहीं करने पर पटना पुलिस को नियमानुसार उसे गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है।
न्यायिक अधिकारी की फाइल एक्टिंग चीफ जस्टिस के पास जाएगी
मामले में हाईकोर्ट ने अपने महानिबंधक कार्यालय को संबंधित सभी संचिकाएं कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। इन दस्तावेजों के आधार पर संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
इस आदेश के बाद न्यायिक प्रक्रिया में जमानत आदेश पारित करने के तरीके और न्यायिक रिकॉर्ड के सावधानीपूर्वक परीक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में सामने आए तथ्यों की प्रशासनिक स्तर पर भी समीक्षा जरूरी है।
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