लखीसराय में इन दिनों जमीन का खेल कुछ ऐसा चल रहा है कि असली मालिक सिर्फ कागजों में रह जाता है और सौदा कोई और कर जाता है। टाउन थाना कांड संख्या 619/24 में पुलिस की चार्जशीट ने इसी ‘पेपर गेम’ की परतें खोल दी हैं। मामला सीधा है, लेकिन कहानी फिल्मी—“जमीन आपकी, रजिस्ट्री हमारी!”
दो साल पहले दर्ज इस केस में वादी मनोज कुमार अग्रवाल का आरोप है कि मौजा मथार खगौर की 68 डिसमिल जमीन में से उनके हिस्से की करीब 21.093 डिसमिल जमीन को कुछ लोगों ने मिलकर ऐसे बेच दिया, जैसे वह उनकी खुद की हो। खास बात ये कि मनोज अग्रवाल उस समय लखनऊ में रह रहे थे, और इसी दूरी को कथित तौर पर पूरा खेल बनाने का मौका बना लिया गया।
पुलिस जांच में मामला सही पाया गया और अब सांवलराम ड्रोलिया, निर्मल ड्रोलिया, मुहम्मद कलाम और कांति देवी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। दो आरोपी पहले जेल की हवा खा चुके हैं और फिलहाल बेल पर बाहर हैं, जबकि बाकी ने पहले ही जमानत की ढाल ले रखी है।
इस केस की सबसे दिलचस्प और चुभने वाली बात ये है कि पीड़ित अपनी ही जमीन पाने के लिए पिछले दो साल से शहर-शहर भटक रहा है। लखनऊ से लखीसराय तक की दौड़, कागजों से लेकर कोर्ट तक की लड़ाई—सब कुछ सिर्फ इसलिए कि “जो मेरा है, वो मुझे मिल जाए।”
अब सवाल वही पुराना लेकिन तगड़ा—क्या जमीन अब सिर्फ कागजों का खेल बनकर रह गई है? क्या बाहर रहने वाले लोगों की संपत्ति सबसे आसान टारगेट है? और क्या ये मामला अकेला है, या फिर किसी बड़े खेल की छोटी झलक?
कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी है, क्योंकि अब बारी कोर्ट की है। लेकिन इतना तो तय है—लखीसराय में जमीन का खेल अब सिर्फ जमीन का नहीं, दिमाग और दस्तावेज़ का खेल बन चुका है।
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ब्यूरो हेड महुआ न्यूज़
बिहार /झारखण्ड