लखीसराय (बिहार): मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिले के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से 9 ‘मुन्ना भाई’ को गिरफ्तार किया गया है, जो दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे। इस खुलासे के बाद पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह कार्रवाई सघन जांच और बायोमीट्रिक सत्यापन के दौरान की गई। पुलिस के अनुसार, केंद्रीय विद्यालय से 7, केआरके उच्च विद्यालय से 1 और हसनपुर उच्च विद्यालय से 1 संदिग्ध को पकड़ा गया।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग जिलों और राज्यों से जुड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें मेडिकल कॉलेज के छात्र भी शामिल हैं, जो खुद डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन पैसों के लिए दूसरों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने वाली निजी एजेंसी के 7 कर्मियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आशंका है कि इस पूरे खेल में अंदरूनी मिलीभगत हो सकती है।
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार की निगरानी में प्रशासन की टीम लगातार छापेमारी और जांच में जुटी है। एसडीएम और एसडीपीओ की टीम इस अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय सॉल्वर गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है।
प्रशासन का कहना है कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि संगठित परीक्षा माफिया का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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