पटना: अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए पटना हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार में कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है, तो केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता कि वह सदस्य परिवार से अलग रहता है या आर्थिक मदद नहीं करता।
पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश कुमार मनीष की एकलपीठ ने दरभंगा निवासी अजीत कुमार मंडल की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई पारिवारिक संपत्ति या उत्तराधिकार का अधिकार नहीं है, बल्कि कर्मचारी की मृत्यु से उत्पन्न आर्थिक संकट से परिवार को राहत देने के लिए दी जाने वाली सीमित व्यवस्था है।
मामला दरभंगा जिले के किरतपुर प्रखंड कार्यालय से जुड़ा था। यहां अनुसेवक पद पर कार्यरत एक कर्मचारी की वर्ष 2012 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके भाई अजीत कुमार मंडल ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। लेकिन जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति ने आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार का एक अन्य सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है।
इसके बाद अजीत मंडल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दलील दी कि सरकारी नौकरी करने वाला भाई अलग रहता है और परिवार की आर्थिक मदद नहीं करता। इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और सरकारी नियमों के आधार पर ही अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है। सिर्फ अलग रहने या मदद नहीं करने की बात से पात्रता साबित नहीं होती।
हाई कोर्ट ने जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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