रांची: झारखंड में हजारों शिक्षक परिवारों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत आई है। जिस लाभ के लिए कई शिक्षक अपनी पूरी नौकरी में संघर्ष करते रहे, अब उसका रास्ता उनके परिवारों के लिए भी खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद झारखंड सरकार ने ऐसा नियम बदल दिया है, जिससे मृत और सेवानिवृत्त अप्रशिक्षित शिक्षकों के आश्रित भी ग्रेड-1 वित्तीय लाभ का दावा कर सकेंगे।
मामला सिर्फ एक सरकारी आदेश का नहीं, बल्कि करीब दो दशक पुराने सेवा विवाद का है, जिसने हजारों शिक्षकों के भविष्य और परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया था।
सरकार का पुराना नियम बना था सबसे बड़ी बाधा
वर्ष 2019 में सरकार ने अप्रशिक्षित शिक्षकों को ग्रेड-1 वरीयता देने का दायरा तो बढ़ाया, लेकिन एक शर्त जोड़ दी थी कि मृत और रिटायर शिक्षकों को इसका वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा।
यही शर्त विवाद की सबसे बड़ी वजह बनी। शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और झारखंड हाईकोर्ट ने इस रोक को गलत ठहराते हुए इसे खत्म कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के बाद बदला पूरा खेल
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। इसके बाद अब स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने नया संकल्प जारी कर पुराने प्रावधान को हटा दिया है।
अब जिन शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवार और रिटायर शिक्षक खुद विभाग में आवेदन देकर अपने दावे की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।
नौकरी खत्म, अधिकार नहीं’… अब परिवारों को उम्मीद
नए आदेश से उन परिवारों को बड़ी उम्मीद जगी है, जिनके शिक्षक सदस्य सेवा के दौरान या रिटायरमेंट के बाद ग्रेड-1 लाभ का इंतजार करते रह गए।
इस फैसले का असर 1982 से लेकर 2012 तक नियुक्त कई पात्र शिक्षकों पर पड़ेगा। इसमें पुराने नियुक्ति वर्षों के अप्रशिक्षित शिक्षक और अनुकंपा नियुक्त शिक्षक भी शामिल हैं।
ग्रेड-1 सिर्फ पद नहीं, आर्थिक सुरक्षा का आधार
ग्रेड-1 का फायदा सिर्फ एक पदोन्नति नहीं है। इसका असर वेतन, वरिष्ठता, आगे की प्रोन्नति और रिटायरमेंट लाभ तक पड़ता है।
अब देखना होगा कि आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद कितने शिक्षक परिवारों को इसका वास्तविक आर्थिक लाभ मिल पाता है।
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