रांची: झारखंड सरकार में अफसरों के रवैये को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कैबिनेट विभाग की अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कुछ अधिकारियों के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मंत्री ने अपने पत्र में साफ कहा है कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मंत्रिमंडल सचिवालय और निगरानी विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी न केवल निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि उनका व्यवहार भी अहंकार भरा है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर की चेतावनी
राधाकृष्ण किशोर ने लिखा कि इस तरह का रवैया संसदीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। अगर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवाद नहीं होगा, तो इससे विधायिका और कार्यपालिका के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए जरूरी है कि शिष्टाचार से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
फोन नहीं उठाते, कॉल बैक भी नहीं करते
पत्र में मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते। कई बार उनका मोबाइल स्विच ऑफ रहता है और वे पत्रों या सुझावों का जवाब भी नहीं देते।
उन्होंने याद दिलाया कि मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग ने अधिकारियों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं—जनप्रतिनिधियों से सम्मानजनक व्यवहार, उनकी बात सुनना, समय पर कार्रवाई करना, मोबाइल चालू रखना और कॉल मिस होने पर वापस संपर्क करना।
निर्देशों के सख्त अनुपालन की मांग
वित्त मंत्री ने कैबिनेट विभाग से इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
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