चाईबासा: चाईबासा में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली डीएमएफटी (District Mineral Foundation Trust) राशि के इस्तेमाल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीएमएफटी फंड के खर्च पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
मरांडी ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के तीन दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और क्षेत्र का जायजा लिया। इस दौरान पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित इलाकों के लिए करोड़ों रुपये मिलने के बावजूद उसका वास्तविक लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया है।
उन्होंने दावा किया कि जिले को पिछले दस वर्षों में डीएमएफटी मद से करीब 3742.15 करोड़ रुपये मिले, जिसमें बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी धरातल पर बदलाव नजर नहीं आ रहा। मरांडी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को डीएमएफटी फंड से जुड़े सभी खर्चों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि राशि किन योजनाओं में खर्च हुई, कितने काम पूरे हुए और कितने लंबित हैं, इसकी पूरी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए।
मरांडी ने यह भी कहा कि खनिज संपदा से भरपूर पश्चिमी सिंहभूम में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण लोगों का पलायन बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
कांग्रेस ने आरोपों को बताया राजनीतिक बयान
वहीं, कांग्रेस ने बाबूलाल मरांडी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे तथ्यहीन और राजनीतिक बयान बताया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने डीएमएफटी फंड के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में कई विकास कार्य कराए हैं।
उन्होंने दावा किया कि डीएमएफटी राशि से ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति, सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम किए गए हैं।
डीएमएफटी फंड को लेकर अब भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। एक ओर जहां विपक्ष खर्च का हिसाब मांग रहा है, वहीं सरकार समर्थक इसे विकास योजनाओं में इस्तेमाल होने का दावा कर रहे हैं।