पटना: बिहार खेल विभाग ने राज्य में खेल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर ने समीक्षा बैठक में जिला खेल पदाधिकारियों (DSO) और अन्य अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मैदानी निरीक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि खेल मैदानों और परिसरों का दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत समझने और समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी तरीका है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे प्रखंड स्तर के खेल मैदान, आउटडोर स्टेडियम और जिला स्तरीय व्यायामशालाओं का नियमित निरीक्षण करें तथा खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों से संवाद स्थापित करें।
बैठक में खेल आधारभूत संरचना (Sports Infrastructure) के विकास और रख-रखाव को भी प्रमुख प्राथमिकता में रखा गया। डॉ. राजेंदर ने कहा कि केवल नए स्टेडियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता और नियमित देखभाल सुनिश्चित करना भी जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
राज्य में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence) स्थापित करने की योजना की भी समीक्षा की गई। इसके तहत विभिन्न जिलों में विशेष खेलों के लिए उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जाएंगे—जैसे किशनगंज में ताइक्वांडो, अरवल में कबड्डी और मधेपुरा में बैडमिंटन। पहले चरण में 6 से 7 केंद्र शुरू करने की योजना है।
वहीं एकलव्य प्रशिक्षण केंद्रों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों को कहा गया कि सभी केंद्रों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखें। वर्तमान में राज्य में 29 एकलव्य केंद्र संचालित हैं, जहां 1250 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। मई के अंत तक 18 नए केंद्र शुरू करने की तैयारी है।
इस दौरान बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि राज्य के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल बेहतर अवसर और सुविधाओं की। उन्होंने कहा कि एकलव्य केंद्रों का विस्तार और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
बैठक में खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा जनवरी में परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं और जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे खेल प्रशासन को और सशक्त बनाया जा सके।
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