लखीसराय: आज के दौर में जहां युवा अपने करियर को लेकर पारंपरिक रास्तों पर चलते हैं, वहीं शिवांशु गुप्ता ‘ARVIND’ ने एक अलग पहचान बनाई है। उनके लिए उद्यमिता केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज की जटिल समस्याओं को हल करने का एक बौद्धिक दृष्टिकोण है।
बचपन से ही तकनीक के प्रति उनकी रुचि सामान्य नहीं रही। जब अन्य बच्चे खेलकूद में व्यस्त थे, तब शिवांशु मोटर्स, सर्किट्स और रसायनों के जरिए विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझने में लगे रहते थे। इस जिज्ञासा का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब उन्होंने PSLV-C35 का मॉडल तैयार किया। लगातार दो वर्षों की असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः उसे सफलतापूर्वक उड़ाया। यह उनकी सीखने की क्षमता और धैर्य का प्रतीक है।
कोविड-19 महामारी के दौरान, जब पूरी दुनिया ठहर सी गई थी, शिवांशु ने इस समय को अवसर में बदला। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला गेम और अपनी कक्षा के लिए एक एप्लीकेशन विकसित किया। इसी अनुभव ने उन्हें यह समझ दी कि तकनीक का लोकतंत्रीकरण बेहद जरूरी है और यह किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
समय के साथ उनके सामने एक स्पष्ट लक्ष्य उभरा—एक ऐसा व्यक्तित्व बनना, जिसे आने वाली पीढ़ियां उसके प्रभाव और योगदान के लिए याद रखें। इसी सोच ने जन्म दिया Simplora Research and Innovations Pvt. Ltd. को।
Simplora का उद्देश्य केवल एक स्टार्टअप बनाना नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, सुलभ और आधुनिक बनाना है। शिवांशु का मानना है कि भारत में प्रतिभा और अच्छे शिक्षकों की कमी नहीं है, बल्कि चुनौती उनके सही वितरण और प्रबंधन की है। उनका AI-आधारित प्लेटफॉर्म इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है, जो छात्रों, शिक्षकों और स्कूलों के लिए एक व्यक्तिगत सहायक की तरह कार्य करता है।
युवा उद्यमियों को अक्सर संदेह की नजर से देखा जाता है, लेकिन शिवांशु का दृष्टिकोण इस पर बिल्कुल स्पष्ट है—वे अपने काम और उसके परिणामों से जवाब देना पसंद करते हैं। उनका मूल मंत्र “We Are, Because We Care” इसी सोच को दर्शाता है।
आज वे केवल एक उत्पाद नहीं बना रहे, बल्कि एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिस पर भविष्य की शिक्षा प्रणाली आधारित हो सकती है। उनका विश्वास है कि आने वाले समय में हर बच्चे तक उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और आधुनिक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है।
समस्याएं हर समाज में होती हैं, लेकिन उन्हें स्वीकार कर लेना ही सबसे बड़ी चुनौती है। शिवांशु गुप्ता ‘ARVIND’ उन लोगों में से हैं, जो इस स्वीकृति को बदलने का साहस रखते हैं।
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