पटना: NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद का असर अब कई जिलों में दिखने लगा है। छात्र संगठनों AISA और RYA के आह्वान पर आयोजित बंद को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला है।
सुबह से ही प्रशासन ने पूरे बिहार में सुरक्षा का घेरा कस दिया है। सरकार ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए करीब 70 हजार जवानों की तैनाती की है। पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और संवेदनशील इलाकों में दंगा नियंत्रण बल को उतारा गया है।
समस्तीपुर में छात्रों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर आगजनी की और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब दो घंटे में जाम हटवाया। वहीं जहानाबाद में पुलिस लगातार गश्त करती नजर आई।
पटना में प्रशासन ने पहले ही हाई अलर्ट जारी कर दिया था। जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, करगिल चौक, हाईकोर्ट, अशोक राजपथ और मुख्यमंत्री आवास के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। जेपी गोलंबर पर वाटर कैनन के साथ जवानों की तैनाती की गई है।
रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। पटना जंक्शन, राजेंद्रनगर टर्मिनल सहित प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल मुस्तैद है।
प्रशासन का सख्त संदेश
मुख्य सचिव और डीजीपी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि किसी भी असामाजिक तत्व को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ा दी है। भड़काऊ पोस्ट और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
छात्र संगठनों का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्र NEET पेपर लीक मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसके खिलाफ यह आंदोलन किया जा रहा है।
सियासी समर्थन से बढ़ी सरकार की मुश्किलें
बिहार बंद को राजद, कांग्रेस, वाम दलों और वीआईपी का समर्थन मिला है। ऐसे में छात्र आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है।
प्रशासन की चुनौती यह है कि प्रदर्शनकारियों की आवाज भी सुनी जाए और कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। आने वाले घंटे बिहार बंद की दिशा तय करेंगे।
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