लखीसराय: अशोक धाम मंदिर परिसर में 17 अगस्त को जलाभिषेक के दौरान हुई भगदड़ के बाद अब मृतकों की संख्या को लेकर भाकपा-माले और जिला प्रशासन के दावों में अंतर सामने आया है। जिला प्रशासन ने घटना में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत और 25 लोगों के घायल होने की जानकारी दी है, जबकि भाकपा-माले की जांच टीम ने दावा किया है कि भगदड़ में कुल 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें 8 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं।
भाकपा-माले की जोनल कमेटी के सदस्य शिवनंदन पंडित और शिक्षक नेता सत्यार्थी ने 17 अगस्त को अशोक धाम परिसर पहुंचकर घटना की जांच की। जांच टीम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए की गई बैरिकेडिंग के कारण रास्ता संकरा हो गया था।
बैरिकेडिंग और बिजली के पोल को लेकर उठाए सवाल
भाकपा-माले की जांच टीम के मुताबिक, अशोक धाम रेलवे स्टेशन के पास से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर दो तरफ बैरिकेडिंग की गई थी। दूसरी ओर धान के खेत की तरफ भी बांस से बैरिकेडिंग की गई थी। इससे श्रद्धालुओं के लिए रास्ता काफी संकरा हो गया।
जांच टीम का दावा है कि बैरिकेडिंग भीड़ के दबाव में टूटकर पास लगे बिजली के पोल पर जा गिरी। पोल पर्याप्त गहराई तक नहीं गड़ा होने के कारण उखड़ गया। इसके बाद अफरा-तफरी की स्थिति बनी और भगदड़ मच गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए।
हालांकि, बिजली के पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह से भगदड़ शुरू होने की बात की आधिकारिक जांच अभी बाकी है।
मृतकों के परिजनों को 20 लाख मुआवजे की मांग
भाकपा-माले ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और घायलों को इलाज के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
पार्टी ने घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। भाकपा-माले ने 22 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
प्रशासन ने गठित की तीन सदस्यीय जांच टीम
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। अपर समाहर्ता नीरज कुमार को जांच टीम का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शिवम कुमार को सदस्य बनाया गया है।
जांच टीम को घटना के कारणों, घटनाक्रम और प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत पहलुओं की प्रारंभिक जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
अफवाह से भगदड़ तक की होगी जांच
जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि बिजली के पोल गिरने और करंट फैलने संबंधी अफवाह कैसे फैली और उसके बाद भीड़ की प्रतिक्रिया क्या रही। इसके साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के रास्ते, बैरिकेडिंग, भीड़ नियंत्रण और मौके पर मौजूद प्रशासनिक एवं पुलिस बल की व्यवस्था की भी समीक्षा होगी।
जांच टीम सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करेगी। घटना के समय मौजूद अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों द्वारा उठाए गए कदमों की प्रभावशीलता की भी जांच की जाएगी।
भाकपा-माले ने जांच टीम पर भी उठाया सवाल
भाकपा-माले ने प्रशासन की ओर से गठित जांच टीम की संरचना पर सवाल उठाया है। पार्टी ने पूछा है कि जब डीएम और एसपी के संयुक्त आदेश में श्रावणी मेला के दौरान विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी एसडीपीओ शिवम कुमार और एसडीपीओ प्रभाकर कुमार को दी गई थी, तो फिर उन्हीं अधिकारियों को जांच टीम में शामिल क्यों किया गया?
पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि श्रद्धालुओं के मंदिर प्रवेश के लिए मुख्य गेट की जगह दक्षिणी गेट को प्राथमिकता क्यों दी गई और बीएड कॉलेज रोड से मंदिर तक श्रद्धालुओं के आवागमन पर रोक क्यों लगाई गई।
भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के उपाय भी सुझाएगी टीम
जिला प्रशासन के मुताबिक, जांच केवल घटना के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी। टीम भविष्य में धार्मिक आयोजनों के दौरान ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश-निकास प्रणाली में सुधार को लेकर सुझाव भी देगी।
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अशोक धाम में भगदड़ की वास्तविक वजह क्या थी, अफवाह कैसे फैली, भीड़ क्यों बेकाबू हुई और मौके पर मौजूद प्रशासनिक व्यवस्था हादसे को रोकने में कितनी प्रभावी रही।
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