मुंगेर (बिहार): मुंगेर में ग्रामीण युवाओं के सपनों को पंख देने की एक खास पहल इन दिनों चर्चा में है। यहां विज़न इंडिया की टैलंट फाउंडेशन, आईटीसी के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के सहयोग से ऐसा अभियान चला रही है, जो सिर्फ ट्रेनिंग नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने का काम कर रहा है।
जिले के अलग-अलग इलाकों से आए 503 युवाओं को इस कार्यक्रम के तहत रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये प्रशिक्षण केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे नौकरी से जुड़ी स्किल्स पर आधारित है। इसमें कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव, वेयरहाउस पैकर, टू व्हीलर सर्विस तकनीशियन, इलेक्ट्रिशियन और सेल्स एसोसिएट जैसी भूमिकाओं के लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण आईटीआई मुंगेर, जमालपुर और पूरबसराय जैसे केंद्रों पर चल रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को अपने ही आसपास बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
इस पहल का मकसद साफ है—गांवों में छिपी प्रतिभा को पहचानना और उसे ऐसा हुनर देना, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। विज़न इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विवेक कुमार के अनुसार, गांवों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती, जरूरत सिर्फ सही दिशा और प्रशिक्षण की होती है। उनका मानना है कि अगर इन युवाओं को सही प्लेटफॉर्म मिले, तो वे देश के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के स्तर में सुधार तो हुआ है, लेकिन आत्मविश्वास की कमी अब भी कई युवाओं के रास्ते में बाधा बनती है। यही वजह है कि इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में केवल तकनीकी स्किल्स ही नहीं, बल्कि संवाद कौशल (कम्युनिकेशन स्किल) पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। युवाओं को सिखाया जा रहा है कि वे इंटरव्यू में कैसे बात करें, कॉर्पोरेट माहौल में कैसे खुद को प्रस्तुत करें और अपने आत्मविश्वास को कैसे मजबूत बनाएं।
इस पहल का असर भी अब साफ दिखने लगा है। प्रशिक्षण में शामिल खुशी कुमारी बताती हैं कि उनकी अंग्रेजी और बातचीत करने का तरीका पहले से काफी बेहतर हुआ है। वहीं, डॉली ने बताया कि ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें एक निजी कंपनी में नौकरी मिल गई है, जिससे अब वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद कर रही हैं। शिवम पाल और समीर राज जैसे युवाओं का कहना है कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें न सिर्फ नौकरी दिलाने में मदद की, बल्कि कॉर्पोरेट माहौल में खुद को ढालने का आत्मविश्वास भी दिया।
मुंगेर की यह पहल एक मिसाल बनती जा रही है, जहां सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि हुनर को प्राथमिकता दी जा रही है। यह कार्यक्रम यह साबित करता है कि अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो गांव के युवा भी बड़े सपनों को सच कर सकते हैं।
यह सिर्फ एक ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं, बल्कि उन हजारों सपनों की शुरुआत है, जो अब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
ये खबर भी पढ़े: Success Story : 27 साल का अनुभव, हजारों दुल्हनों का भरोसा—जानिए क्यों हर्षा मोदी बन गई हैं गुजरात की No.1 मेकअप आर्टिस्ट!