गयाजी (बिहार): कोलकाता की भीड़भाड़ वाली गलियों में कभी एक आम आवारा कुत्ते की तरह भटकने वाला ‘आलोक’ आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। उसकी कहानी सिर्फ एक जानवर की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, दया और बदलाव की एक जीवंत मिसाल है।
जब जिंदगी उसे सड़कों पर संघर्ष करना सिखा रही थी, तभी उसकी मुलाकात वियतनामी-अमेरिकी बौद्ध भिक्षु पन्नकारा थेरो से हुई। यह मुलाकात ही उसकी किस्मत बदलने वाली साबित हुई। भिक्षु ने उसे अपनाया, स्नेह दिया और अपने साथ शांति की राह पर चलने का अवसर दिया।
धीरे-धीरे ‘आलोक’ सिर्फ एक पालतू कुत्ता नहीं रहा, बल्कि वह प्रेम, अहिंसा और करुणा का जीवंत प्रतीक बन गया। आज वह भिक्षु के साथ विश्व शांति यात्रा में शामिल होकर लोगों के दिलों को छू रहा है।
हाल ही में जब यह यात्रा बोधगया के महाबोधी मंदिर पहुंची, तो लोगों की नजरें सिर्फ भिक्षु पर नहीं, बल्कि उनके इस खास साथी ‘आलोक’ पर भी टिक गईं। मंदिर परिसर में दोनों ने पूजा-अर्चना की और बोधि वृक्ष के दर्शन किए।
‘आलोक’ की उपस्थिति लोगों को यह एहसास दिलाती है कि प्रेम और दया की कोई सीमा नहीं होती—न जाति, न भाषा, न ही प्रजाति।
वर्ष 2025 में 3700 किलोमीटर की लंबी शांति पदयात्रा का हिस्सा बनकर ‘आलोक’ ने यह साबित कर दिया कि बदलाव की कहानी कहीं से भी शुरू हो सकती है—यहां तक कि एक सड़क पर भटकने वाले जीव से भी।
आज ‘आलोक’ सिर्फ एक कुत्ता नहीं, बल्कि उम्मीद का नाम है… जो हर किसी को सिखाता है कि अगर साथ और संवेदना मिल जाए, तो जिंदगी किसी भी मोड़ पर बदल सकती है।
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