लखीसराय: पिपरिया दियारा में शनिवार को आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम पूरी तरह “विकास उत्सव” में बदल गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, हाथी-घोड़ों की अगवानी, मार्च पास्ट और भारी भीड़ के बीच करीब 3270.74 लाख रुपये की लागत से बनने वाले प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय और आवासीय भवन की आधारशिला रखी गई। 32 साल से लंबित इस मांग के पूरा होने पर क्षेत्र में जश्न का माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत भव्य स्वागत से हुई। लाल इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर माहौल को उत्सवी बना दिया। इसके साथ ही स्कूल की जल, थल और वायु सेना की टुकड़ियों ने अनुशासित मार्च पास्ट करते हुए ड्रम की ताल पर मुख्य अतिथियों को मंच तक पहुंचाया। खचाखच भरे दर्शक दीर्घा में लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साह बढ़ाया। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने भी इस प्रस्तुति की खुलकर सराहना की। कार्यक्रम का आयोजन लखीसराय के पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रामशंकर शर्मा उर्फ नुनु बाबू ने तथा संचालन सुशांत सिंह ने किया।

हालांकि इस पूरे कार्यक्रम की सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयान और भोज को लेकर रही। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “आज भाषण देने का नहीं, खुशी मनाने का दिन है। घर जाइए और खीर-पूड़ी खाइए।” लेकिन दूसरी ओर कार्यक्रम स्थल पर मटन-चावल का भव्य भोज रखा गया था। मंच से खीर-पूड़ी की अपील और जमीन पर मटन-चावल का इंतजाम—इस विरोधाभास ने पूरे आयोजन को चर्चा का विषय बना दिया।

अपने भाषण में ललन सिंह ने पिपरिया प्रखंड कार्यालय की 32 साल पुरानी मांग पूरी होने को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब दियारा क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्माण कार्य में किसी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ी तो वे “रौद्र रूप” भी धारण करेंगे।

भाषण के दौरान उन्होंने RJD और लालू परिवार पर भी निशाना साधा, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 2005 के बाद बिहार में सड़क, बिजली और सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है और विकास की रफ्तार तेज हुई है।

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह और विधायक रामानंद मंडल भी मौजूद रहे। श्रवण कुमार ने सरकार की योजनाओं, खासकर जीविका समूहों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण को रेखांकित किया, जबकि लेशी सिंह ने भरोसा दिलाया कि सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे।

इतने बड़े आयोजन के बावजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही, जिससे सियासी गलियारों में अंदरूनी खींचतान की अटकलें तेज हो गई हैं।

कुल मिलाकर पिपरिया का यह शिलान्यास कार्यक्रम सिर्फ एक सरकारी औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि विकास, उत्सव और सियासत का ऐसा संगम बन गया, जिसमें “खीर-पूड़ी” और “मटन-चावल” दोनों ने अपनी अलग-अलग कहानी लिख दी।
