मुंगेर की धरती को यूं ही ऊर्जावान नहीं कहा जाता… इस मिट्टी ने न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि बिहार की राजनीति को भी दिशा दी है। खास बात यह है कि इसी पुराने मुंगेर जिले की धरती ने राज्य को तीन-तीन मुख्यमंत्री दिए—जो अपने-अपने दौर में बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे।
सबसे पहले नाम आता है डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का, जिन्हें “बिहार केसरी” के नाम से जाना जाता है। 1946 में वे बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने और 1961 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य की नींव मजबूत की। उनका संबंध बरबीघा (तत्कालीन मुंगेर जिला) से रहा।
इसके बाद इसी क्षेत्र से चंद्रशेखर सिंह ने 1983 से 1985 तक मुख्यमंत्री के रूप में बिहार का नेतृत्व किया। वे जमुई (जो पहले मुंगेर का हिस्सा था) से आते थे और अपने प्रशासनिक फैसलों के लिए जाने गए।
अब हाल के दौर में 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया। उनका संबंध मुंगेर जिले के तारापुर क्षेत्र से है।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि आज का मुंगेर, जमुई और शेखपुरा कभी एक ही जिला हुआ करता था। 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में प्रशासनिक सुगमता के लिए इस बड़े जिले का पुनर्गठन किया गया। 1991-94 के बीच जमुई और शेखपुरा को अलग-अलग जिले का दर्जा दिया गया।
यानी, भले ही आज ये जिले अलग-अलग पहचान रखते हों, लेकिन इनकी जड़ें एक ही ऐतिहासिक मुंगेर से जुड़ी हैं—एक ऐसी धरती, जिसने बिहार को नेतृत्व देने वाले चेहरे दिए।
आज भी जब बिहार की राजनीति की बात होती है, तो मुंगेर की यह विरासत गर्व के साथ याद की जाती है—
“एक जिला… तीन मुख्यमंत्री… और अनगिनत राजनीतिक कहानियां!”
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