शेखोपुरसराय {शेखपुरा}: अंबेडकर जयंती पर जहां पूरे देश में डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर बड़े-बड़े आयोजन, भाषण और सम्मान की बातें की गईं, वहीं शेखोपुरसराय की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
नगर पंचायत क्षेत्र के भेड़िया पुल के पास लगी बाबा साहेब की प्रतिमा आज भी खुले आसमान के नीचे बदहाल स्थिति में खड़ी है। तेज धूप हो या बारिश—ना कोई छत, ना सुरक्षा, ना ही देखभाल की कोई ठोस व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय यही जगह अचानक “महत्वपूर्ण” बन जाती है। नेता आते हैं, माला चढ़ाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और सोशल मीडिया पर खुद को समाजसेवी दिखाते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होता है, बाबा साहेब की प्रतिमा फिर से उपेक्षा का शिकार हो जाती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पास में स्थित अंबेडकर भवन की हालत भी जर्जर हो चुकी है। दीवारें टूट रही हैं, देखभाल न के बराबर है, और यह भवन खुद अपनी बदहाली की कहानी कह रहा है।
अब सवाल सीधे सिस्टम पर उठ रहे हैं—
क्या सम्मान सिर्फ मंच और भाषण तक सीमित है?
क्या एक छत बनवाना भी इतना मुश्किल काम है?
या फिर बाबा साहेब का नाम सिर्फ राजनीति और वोट बैंक तक ही सीमित कर दिया गया है?
स्थानीय लोगों में नाराजगी साफ देखी जा रही है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह मुद्दा बड़ा आंदोलन बन सकता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में नगर पंचायत और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है… और सबसे बड़ा सवाल यही—
क्या बाबा साहेब सिर्फ माला और फोटो तक ही सीमित रह जाएंगे?
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मो.सरवर आलम, शेखोपुरसराय {शेखपुरा}