शेखपुरा में ‘चमकी बुखार’ को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। एनआईसी कार्यालय परिसर में जिलाधिकारी शेखर आनंद की अध्यक्षता में एक अहम ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह भी जुड़े।
बैठक में एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम, इलाज और प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सिविल सर्जन डॉ संजय कुमार समेत कई स्वास्थ्य अधिकारियों ने जिले की तैयारियों की जानकारी दी।
डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी खासकर 1 से 15 वर्ष के बच्चों को प्रभावित करती है और गर्मी व नमी के मौसम में इसका खतरा बढ़ जाता है। तेज बुखार, शरीर में ऐंठन, बेहोशी और दिमाग पर असर इसके प्रमुख लक्षण हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए सिर्फ अस्पताल ही नहीं, बल्कि समाज स्तर पर जागरूकता बेहद जरूरी है। वहीं, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ दयानिधि शंकर ने कहा कि सरकार इस बीमारी को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों को खास सलाह दी है कि बच्चों को तेज धूप से बचाएं, साफ-सफाई का ध्यान रखें और संतुलित आहार दें। खासतौर पर लीची या कच्चे फलों का सेवन खाली पेट न करने की चेतावनी दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे में तेज बुखार, झटके या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में इलाज कराना चाहिए।
गौरतलब है कि अप्रैल से जुलाई तक का समय इस बीमारी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की यह सक्रियता आने वाले दिनों में कई मासूमों की जान बचाने में अहम साबित हो सकती है।
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