कटिहार से एक शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने राज्य में लागू शराबबंदी कानून और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़ा कर दिया है। समेली प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार सिंह कथित तौर पर शराब के नशे में धुत होकर अस्पताल परिसर में बेसुध पड़े पाए गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि डॉक्टर इतनी नशे की हालत में थे कि उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा था। अस्पताल परिसर में उनकी अर्धनग्न स्थिति और बेसुध पड़े होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि डॉ. सिंह ने जन्म प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर कराने आए नागरिकों से पैसे की मांग भी की। यह घटना न केवल डॉक्टर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी की अनदेखी है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न खड़ा करती है। स्थानीय युवक पुलकित यादव ने कहा कि “एक जिम्मेदार पद पर बैठे डॉक्टर का इस तरह नशे में सार्वजनिक स्थान पर पड़े रहना बेहद शर्मनाक है। ऐसे अधिकारी पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। मध निषेध विभाग को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही पोठिया थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नशे की हालत में पड़े डॉ. सिंह को थाने ले गई। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और दोषी अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बावजूद सरकारी अधिकारियों द्वारा नियमों की अवहेलना का एक गंभीर उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पालन और निगरानी की भी सख्त व्यवस्था होनी चाहिए। स्थानीय लोगों में उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में सख्ती दिखाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कटिहार की यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि राज्य प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही की भी पड़ताल करती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और लोगों की निगाहें कार्रवाई की दिशा पर टिकी हुई हैं।
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कटिहार से सुमन शर्मा की रिपोर्ट…