लखीसराय: रामदेव सिंह उर्फ हुकुम बाबा के निधन के साथ ही लखीसराय ने अपने अंतिम स्वतंत्रता सेनानी को खो दिया। 105 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई और हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
पिपरिया प्रखंड के रामचंद्रपुर गांव के निवासी रामदेव सिंह ने देश की आज़ादी के लिए अपना युवाकाल संघर्ष में बिताया था। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उस दौर में लखीसराय में 13 आंदोलनकारियों पर अंग्रेजों ने गोलियां चलाई थीं, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों का हौसला नहीं टूटा।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर रामदेव सिंह ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। आज़ादी के बाद भी वे हमेशा देशभक्ति और समाज सेवा के प्रतीक बने रहे।
उनकी देशभक्ति की झलक इस वर्ष भी देखने को मिली, जब 26 जनवरी को उन्होंने लखीसराय के शहीद द्वार पर राष्ट्रीय तिरंगा फहराया था। वर्षों से हर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर वे शहीद द्वार पर तिरंगा फहराकर नई पीढ़ी को देशभक्ति का संदेश देते थे।
उनकी ही पहल और अनुरोध पर वर्ष 2025 में नगर परिषद द्वारा शहीद द्वार पर शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया था। इस कार्य में जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र और नगर परिषद सभापति अरविंद पासवान की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
हुकुम बाबा जिला स्वतंत्रता सेनानी संघ के अध्यक्ष भी रहे और जीवन के अंतिम समय तक देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
उनके निधन की खबर सुनते ही सूर्यगढ़ा के विधायक रामानंद मंडल, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष राम शंकर शर्मा उर्फ नुनु बाबू, रवि रंजन उर्फ टनटन सिंह, पूर्व प्रमुख रामविलास शर्मा, लाल इंटरनेशनल विद्यालय के निदेशक मुकेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार कृष्णदेव प्रसाद तथा इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रंजीत सम्राट सहित हजारों लोगों ने पहुंचकर अंतिम दर्शन किए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
हुकुम बाबा का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि उस पीढ़ी का विदा होना है जिसने देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। लखीसराय की धरती हमेशा उनके साहस, त्याग और देशभक्ति की कहानी सुनाती रहेगी।
ये खबर भी पढ़े: Bihar News : बिहार महिला कबड्डी लीग में इनामी राशि में बड़ा इजाफा, सिवान और मगध का दबदबा!
