पटना: बिहार की राजधानी पटना में पुलिस विभाग के भीतर कथित रिश्वतखोरी का गंभीर मामला सामने आया है। फुलवारीशरीफ थाने में मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिए गए दो लोगों को कथित तौर पर 11 लाख रुपये लेकर छोड़ने का आरोप लगा है। शुरुआती जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद पटना पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच पुलिस अवर निरीक्षक समेत आठ पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को निलंबित कर दिया है। सभी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू की गई है।
26 अक्टूबर को हुई थी छापेमारी
मामले की शुरुआत 26 अक्टूबर 2026 को हुई छापेमारी से जुड़ी है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने आलमीजान नगर स्थित एक मुर्गी फार्म पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान आकिब खान उर्फ मोहम्मद साकिब खान (32 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया था। वह नया टोला पठान टोली, वार्ड संख्या-24 का निवासी बताया गया है।
पुलिस ने आकिब खान के खिलाफ फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 दर्ज किया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं।
दो अन्य लोगों को भी पकड़कर थाने लाई थी पुलिस
छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने मोहम्मद आफताब आलम और मोहम्मद एहसान नामक दो अन्य लोगों को भी पकड़कर थाने लाया था। आरोप है कि इन दोनों का नाम मूल प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया और न ही उनकी हिरासत तथा रिहाई के संबंध में वरीय अधिकारियों को विधिवत जानकारी दी गई।
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, दोनों लोगों को छोड़ने के एवज में पुलिसकर्मियों और कथित बिचौलिये के बीच करीब 11 लाख रुपये का लेन-देन हुआ। इसके बाद दोनों को पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया गया। इस कथित लेन-देन को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच रकम के बंटवारे पर विवाद और कहासुनी होने की बात भी सामने आई है। इसी विवाद के बाद पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों तक पहुंची।
रकम के बंटवारे का विवाद बना खुलासे की वजह
मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस के वरीय अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए। फुलवारीशरीफ के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) को पूरे घटनाक्रम की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच के दौरान छापेमारी में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की पड़ताल की गई।
प्रारंभिक जांच में करीब 11 लाख रुपये के कथित लेन-देन और दो लोगों को छोड़ने के मामले में आठ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता प्रथम दृष्टया सामने आई। पुलिस की ओर से यह भी बताया गया है कि इस प्रकरण में कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। कथित बिचौलिये और रकम के लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल जारी है।
पांच दरोगा समेत आठ पुलिसकर्मी निलंबित
प्रारंभिक जांच में जिन आठ पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आई है, उनमें पांच पुलिस अवर निरीक्षक और तीन अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। निलंबित कर्मियों के नाम इस प्रकार हैं—
- पुलिस अवर निरीक्षक दिवाकर प्रसाद
- पुलिस अवर निरीक्षक नारद मुनि सिंह
- पुलिस अवर निरीक्षक रितेश कुमार
- परिचारी पुलिस अवर निरीक्षक आकाश कुमार
- पुलिस अवर निरीक्षक पवन कुमार
- पीटीसी-1118 साबिर आलम
- सिपाही संख्या-8949 आनंद राज
- सिपाही संख्या-9035 शुभम कुमार
इन सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। रिपोर्टों में दिवाकर प्रसाद को थाने का एडिशनल एसएचओ बताया गया है। पुलिस प्रशासन ने इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के साथ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी है।
स्थानीय लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस पूरे प्रकरण में पुलिसकर्मियों के अलावा कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर रकम किसके माध्यम से दी गई, उसका लेन-देन किन माध्यमों से हुआ और दोनों लोगों को छोड़ने में किसकी क्या भूमिका रही। मीडिया रिपोर्टों में कथित बिचौलिये और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ एवं हिरासत की भी जानकारी दी गई है।
पुलिस महकमे में कार्रवाई से मचा हड़कंप
फुलवारीशरीफ थाने से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। जिन पुलिसकर्मियों पर कानून का पालन कराने और अपराध के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं पर हिरासत में लिए गए लोगों को कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़ने का आरोप लगा है।
फिलहाल आठ पुलिसकर्मियों का निलंबन प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई है। प्राथमिकी और आगे की जांच के जरिए पूरे घटनाक्रम, कथित 11 लाख रुपये के लेन-देन तथा प्रत्येक पुलिसकर्मी की भूमिका स्पष्ट होनी बाकी है। जांच के अंतिम निष्कर्ष और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
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